बैठक में वरुण गांधी नहीं हुए शामिल
सांसदों ने यदि बिना तालमेल के अभियान के नाम पर खानापूरी कर दी तो आगे चलकर यह उनके लिए भारी पड़ने वाला है। बदायूं की सांसद संघमित्रा मौर्य के विरोध की कहानी सबके सामने है और पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी आए दिन अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में यह देखना भी दिलचस्प होगा कि वे इस अभियान का हिस्सा कैसे बनते हैं, और प्रेसवार्ता कर मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ में क्या कहते हैं। बृहस्पतिवार को हुई बैठक में भी वह शामिल नहीं थे।
लखीमपुर खीरी में तिकुनिया विवाद के बाद लोकसभा का गणित बदला हुआ होगा। निकाय चुनाव में 10 में पांच सीटें भाजपा ने यहां भी गंवाई हैं। शाहजहांपुर में भले नगर निगम जीत लिया हो मगर 12 में से सात सीटों पर भाजपा हारी है। निकाय चुनाव के परिणाम कहानी कुछ और ही कह रहे हैं।
ऐसे में इस एक माह के अभियान से भाजपा मतदाताओं को अपने साथ दोबारा जोड़ने के रास्ते तलाशेगी और इसी बहाने गुटबाजी को खत्म कर लोकसभा चुनाव में जुटने का संदेश देगी। इन अभियानों का रोडमैप तैयार करने के लिए 20 और 21 मई को जिला कार्यसमिति व 22, 23 और 24 मई को मंडल कार्यसमिति की बैठकें होंगी।
अभियान वही, बस तरीके बदल दिए
भाजपा पहले भी इस तरह के अभियान चला चुकी है मगर इस बार इसमें मामूली तब्दीली उनके स्वरूप को पूरी तरह बदल रही है। अभी तक पार्टी के सहयोगी मोर्चे अलग-अलग स्वागत कार्यक्रम और रैलियां करते थे। अब इन्हें एक साथ रैली करने के निर्देश हैं। इससे एकजुटता को बढ़ावा मिलेगा। प्रबुद्ध वर्ग में अब तक अगड़ी जातियों और प्रोफेसरों को जोड़ा जाता था। इस बार सभी वर्ग से लोगों को इसमें लेने को कहा गया है।
सोशल मीडिया के मशहूर लोगों को पहले भी जोड़ा जाता रहा है मगर इस बार ऐसे लोगों को भी शामिल करने को कहा गया है जो भाजपा की योजनाओं की पड़ताल करते रहते हैं या विरोध में होते हैं। अब तक प्रेसवार्ता कर विकास कार्य गिनाए जाते रहे हैं, अब जो विकास कार्य हुए जैसे एअरपोर्ट, पुल इन्हें जनता को मौके पर ले जाकर दिखाना भी है।
योजनाओं के लाभार्थियों से भाजपाई पहले भी मिलते थे और उनकी सूची बनाते थे। इस बार उनके साथ सेल्फी लेंगे। इसी तरह व्यापारिक सम्मेलन में इस बार बड़े व्यापारियों के स्थान पर हर ट्रेड के छोटे-छोटे व्यापारियों को शामिल करने को कहा गया है। सांसद अपने क्षेत्र में जनता के साथ भ्रमण कार्यक्रम भी रखेंगे।