बरेली। आज से बीस अप्रैल तक अग्निशमन सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। जिले की अग्निशमन सेवाएं सीमित स्टाफ और संसाधनों पर टिकी हैं। विभाग के पास स्टाफ की कमी है पर उपलब्ध संसाधनों के दम पर आग बुझाई जाती है।
जिले की बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर फायर स्टाफ की स्थिति मानक से काफी कम है। शहर के तंग रास्तों और देहात की खराब सड़कों की वजह से कई बार दमकल स्टाफ के सामने अजीबोगरीब स्थिति होती है। शहर के अधिकांश स्थानों पर बंद हो चुके हाइड्रेंट भी परेशानी का सबब बनते हैं।
तंग गलियों के लिए खास इंतजाम
तंग गलियों में आग बुझाने के लिए विभाग को दो बुलेट बाइक मिली हैं। इनमें बड़े फायर सिलिंडर लगे हैं जो गैसजनित आग पर भी काबू पा सकते हैं। दो छोटी गाड़ियां भी ऐसे में काम आती हैं जिनमें पांच सौ लीटर क्षमता का टैंक लगे हैं। ये एअर कंप्रेशर के साथ काम करती हैं।
जिले में अग्निशमन संसाधन एक नजर में
आठ हजार लीटर क्षमता की एक बड़ी गाड़ी, 4500 लीटर की दो फोम टेंडर, 2500 लीटर की दो छोटी गाड़ियां और दो बाइक। परसाखेड़ा केंद्र पर दो गाड़ियां हैं। इनके अलावा मीरगंज, नवाबगंज, आंवला, फरीदपुर और बहेड़ी के अग्निशमन केंद्रों पर एक-एक गाड़ियां उपलब्ध हैं।
सप्ताह भर होंगे कार्यक्रम
14 अप्रैल 1944 को मुंबई बंदरगाह पर हुए भीषण अग्निकांड में 66 अग्निशमन कर्मी शहीद हुए थे। इनकी याद में यह सप्ताह मनाया जाता है। पूरे सप्ताह जागरूकता कार्यक्रम होंगे। - संजीव कुमार, अग्निशमन अधिकारी