बरेली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के मामले में पुलिस बैकफुट पर आ गई है। दरअसल, मथुरा महानगर प्रचारक से दो दरोगाओं के अभद्रता करने के बाद हुए हंगामे की पुलिस ने संघ और भाजपा के तमाम कार्यकर्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। सत्ता पक्ष के नेताओं का दबाव पड़ा तो 24 घंटे के भीतर पुलिस ने मुकदमा खारिज कर दिया। मुकदमा दर्ज करने के कारण ही इंस्पेक्टर सुनील अहलावत को लाइन हाजिर कर दिया गया था। अब एसएसपी ने पीआरओ विश्वजीत सिंह को सुभाषनगर थाने का चार्ज दिया है।
बृहस्पतिवार को मथुरा महानगर के संघ प्रचारक आर्येंद्र कुमार को करगैना चौकी पर तैनात दरोगा अंकित कुमार ने पीट दिया। आरोप था कि अंकित ने छह पुलिस वालों के साथ उन्हें तीन घंटे तक बंधक बनाकर पीटा। बाद में उनकी बाइक का चालान भी कर दिया। बदायूं के रहने वाले आर्येंद्र बरेली के एक अस्पताल में भर्ती अपनी मां के लिए खाना लेने जा रहे थे। जब यह बात संघ कार्यकर्ताओं और भाजपा नेताओं को पता चली तो वह करगैना चौकी पर इकट्ठा हो गए। चौकी का घेराव किया गया। कार्यकर्ताओं ने चौकी के सामने हाईवे पर बैठकर जाम लगा दिया। करीब आधे घंटे तक जाम लगा रहा।
इस मामले में दरोगा अंकित कुमार समेत छह सिपाही और मढ़ीनाथ चौकी इंचार्ज सुनील भारद्वाज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। दोनों दरोगाओं को निलंबित कर दिया गया। पुलिस ने दूसरी तरफ दरोगा विजय सिंह की तरफ से आरएसएस के पदाधिकारी और उनके 150-200 समर्थकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसका पता चलते ही संघ और भाजपा नेताओं में आक्रोश फैल गया। इस मुद्दे को लेकर सर्किट हाउस में एसएसपी की भाजपा के बड़े नेताओं से बातचीत हुई। इसके बाद एसएसपी ने बताया कि मुकदमे को खारिज कर दिया जाएगा। इसके साथ ही संघ कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज करने वाले इंस्पेक्टर सुभाषनगर सुनील अहलावत को भी लाइन हाजिर कर दिया गया। एसएसपी ने पीआरओ विश्वजीत सिंह को सुभाषनगर थाने का चार्ज दे दिया। इसके अलावा जो मुकदमा पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज किया गया है, उसमें जांच चल रही है।