बरेली में इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) के प्रवक्ता डॉ. नफीस के बेटे और करीबी लोग फर्जी नोटरी तैयार कर सुन्नी वक्फ बोर्ड की जमीन को किराये पर देने के मामले में फंस गए हैं। महिला ने विरोध किया तो उसके पति की हत्या करने की धमकी दी गई। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
मलूकपुर बाजदारान निवासी साजदा अख्तर के मुताबिक वक्फ संख्या 96 द्वितीय एक्जेन्टेड बरेली उनका खानदानी वक्फ है। कटघर निवासी तस्लीम मियां, मलूकपुर निवासी वासिफ यार और शहजाद ने लखनऊ वक्फ बोर्ड में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि इस खानदान में कोई सदस्य जीवित नहीं बचा है। साजदा ने पत्र भेजकर बोर्ड को पूरी सच्चाई बताई तो उन्हें सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मुतव्वली बना दिया। तसलीम ने पिछले साल अप्रैल की तारीख डालकर वक्फ की जमीन का एक फर्जी किरायेनामा नोमान खां और फरहान खां के नाम कर दिया।
महिला ने लगाया ये आरोप
नोमान और फरहान खुद को बोर्ड की जमीन का किराएदार बताने लगे। साजदा ने इसका विरोध किया तो इन लोगों ने उनके पति को जान से मारने की धमकी दी। खुद को मुतवल्ली बताने वाली साजदा के मुताबिक कोतवाली में शिकायत की गई लेकिन इन लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई। न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। साजदा के मुताबिक नोमान और फरहान दोनों ही आईएमसी के प्रवक्ता डॉ. नफीस खां के बेटे हैं और तस्लीम उनका करीबी है। राजनीतिक रसूख रखने वाले इन लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करने से बचती है।
आईएमसी के प्रवक्ता डॉ. नफीस खां ने बताया कि साजदा कोई मुतवल्ली नहीं हैं। उसके पति मुन्ना के खिलाफ हमने रिपोर्ट लिखाई थी जिसमें चार्जशीट लग रही है। ये दंपती फर्जी आरोप लगाकर हमारे परिवार को फंसाना चाहते हैं। हमारे पास सभी वैध कागजात हैं जो पुलिस को सौंप दिए जाएंगे।