बरेली। लैब पर सवाल उठते ही आईवीआरआई अब शहर की डेयरियों में एफएमडी वायरस ढूढ़ रही है। बुधवार को संस्थान की टीम ने कई डेयरियों में जाकर पशुओं का चेकअप किया और लगभग दर्जन भर सैंपल लिए। इन्हें जांच के लिए अब मुक्तेश्वर की लैब में भेजा जाएगा। संयुक्त निदेशक डॉ. वीके गुप्ता ने बताया कि बानखाना और अशरफ खां छावनी की डेयरियों में कई पशु ऐसे हैं जिनमें खुरपका और मुंहपका रोग के लक्षण मिले हैं। उन्होंने कहा कि हो सकता है आईवीआरआई के अंदर इन्हीं डेयरियों से वायरस आया हो।
आशंका ये जताई जा रही है कि यह वायरस कहीं संस्थान की लैब में किसी प्रयोग से तो नहीं निकला, क्योंकि यहां के अलावा जिले में कहीं और अब तक इस वायरस से ग्रस्त कोई पशु नहीं पाया गया है। इस आशंका को नकारने की कोशिश में आईवीआरआई ने अपनी टीमों को शहर और गांवों में दौड़ा दिया है। इन टीमों ने फील्ड में जाने से पहले राज्य सरकार के पशु चिकित्सा विभाग को सूचित करना भी मुनासिब नहीं समझा और यह कई डेयरियोें से सैंपल ले आए। आईवीआरआई के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन के कोआर्डिनेटर डॉ. त्रिवेणी दत्त का भी कहना है कि आईवीआरआई फार्म तक वायरस आने के लिए पशु चिकित्सा विभाग ही जिम्मेदार है, क्योंकि यह वायरस उस फील्ड एरिया से फार्म में आया है, जहां के पशुओं की वैक्सीनेशन की जिम्मेदारी पशु चिकित्सा विभाग की है। डॉ. दत्त ने बताया कि फार्म में 35 वैज्ञानिकों की टीमें लगाकर मानीटरिंग कर रही हैं और इसके चलते नया कोई पशु बीमार नहीं पाया गया है।
आईवीआरआई वाले अपनी कमियों को छुपाने के लिए अब वायरस आने की संभावना को फील्ड की ओर मोड़ रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि डेयरियों से अगर वायरस निकला तो सीधे आईवीआरआई ही क्यों चला गया और कहीं क्यों नहीं गया?
-डॉ. एनपीएस गहलोत, अपर निदेशक पशु चिकित्सा विभाग