खास बात यह है कि राशि का भुगतान होने के बाद इन टिनशेडों को भी वहां से गायब कर दिया गया। वास्तविक भू स्वामियों को मुआवजा देने में देरी की गई है, जबकि सिर्फ अधिक मुआवजा हथियाने के लिए उस भूमि पर बिल्डिंग बनाने वाले लोगों के दावों को आनन-फानन में स्वीकार कर लिया गया। अपूर्ण भवनों के लिए भी प्लिंथ बीम के आधार पर मुआवजा निर्धारित कर दिया गया।
ऐसे हुआ खुलासा
परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में फर्जीवाड़ा कर हुए घोटाले का खुलासा 2024 में तब हुआ, जब जून में पीडी बीपी पाठक का उड़ीसा के लिए तबादला हुआ और उनके स्थान पर नए पीडी प्रशांत दुबे आए। मौके पर पक्के निर्माण के निशान न मिलने पर उन्हें शक हुआ तो छानबीन शुरू हुई। इसमें टिनशेड का खेल पकड़ में आ गया और इसकी पुष्टि वर्ष 2021 के गूगल नक्शा से भी हो गई। पुराने नक्शे में जमीन खाली थी। उनकी भेजी गई रिपोर्ट पर मुख्यालय से एनएचएआई के डीडीएम टेक्निकल पीके सिन्हा और सदस्य टेक्निकल एसएस झा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। प्रारंभिक जांच में पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।