बरेली। राज्य भंडारण निगम (एसडब्लूसी) में निर्धारित दरों से 300-400 प्रतिशत ज्यादा पर परिवहन ठेके दिए जाते हैं। ठेके लेने वाली फर्मों में प्रभावशाली नेता और विभागीय स्टाफ भी शामिल रहते हैं। बताया जाता है कि इसी वजह से मनमानी और ऊंची दरों पर टेंडर देकर करोड़ों रुपये की खुली लूट हो रही है। निगम अधिकारी लूट बरकरार रखने को ई-टेंडर नहीं अपनाना चाहते हैं और पिछले तीन माह से यह प्रक्रिया लंबित है। अब प्रबंध निदेशक ने ई-टेंडर प्रक्रिया एक माह आगे बढ़वा दी है, इससे पुराने ठेकेदार मायूम हो गए हैं।
गरीबों को वितरित होने वाला खाद्यान्न गोदामाें में सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी एसडब्लूसी भी संभालता है। बरेली मंडल में 211 हजार टन अनाज रखने की क्षमता है। यह अनाज भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की संपत्ति होती है, एसडब्लूसी इसका किराया वसूलती है। एफसीआई के निर्देश पर एसडब्लूसी यह अनाज रेल गोदाम तक पहुंचता है। अनाज पहुंचाने की इस प्रक्रिया के लिए एसडब्लूसी परिवहन ठेके देता है।
मुख्यालय और नेता शामिल
एसडब्लूसी में परिवहन दरों के खेल में नेता और विभागीय अफसर भी शामिल हैं। चार माह पहले ही शासन ने एमडी, एसपी समेत कई अधिकारी सस्पेंड कर दिए थे। बरेली मंडल देख रहे क्षेत्रीय प्रबंधक एसएन यादव पर भी गाज गिरी है। अफसर मैन्युअल टेंडरों से करोड़ों रुपये का चूना सरकार को लगा रहे हैं। चहेतोें को फायदा दिलाने के लिए परिवहन के ठेके ई-टेंडर प्रणाली से नहीं होने दिए जा रहे हैं। प्रक्रिया तीन माह से लटकी है। ‘अमर उजाला’ ने प्रचलित दरों से 300-400 प्रतिशत ज्यादा पर ठेके दिए जाने की खबर छापी तो खलबली मची है। एमडी रविकांत गोस्वामी ने बरेली मंडल में लंबित ई-टेंडर प्रक्रिया एक माह बढ़ाकर मैन्युअल टेंडर होने की संभावना पर ही विराम लगा दिया है।
बरेली मंडल में परिवहन ई-टेंडर प्रक्रिया तीन माह में पूरी नहीं हो पाई, इसलिए एक माह इसे आगे बढ़ा दिया है। मैन्युअल ठेके नहीं होने देंगे, इसमेें मनमानी होती है। ई-टेंडर में एनसीआई से कुछ जरूरी मदद मांगी गई है। सप्ताह भर में परिणाम आ जाएंगे।
- रविकांत गोस्वामी, एमडी, एसडब्लूसी