बारिश के बाद बिजली आपूर्ति का संकट बरकरार है। केयरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंसी (सीएफए) यूनिट में आइसक्रीम, कोल्ड स्टोरेज में सब्जियों और फलों की सुरक्षा जनरेटर के भरोसे है। रोजाना 10-15 हजार रुपये का डीजल फुंकने से कारोबारियों पर आर्थिक भार पड़ रहा है। जरा सी चूक होने पर आइसक्रीम के पिघलने और फलों-सब्जियों के खराब होने का खतरा भी बरकरार है।
ट्रांसपोर्ट नगर स्थित सीएफए यूनिट संचालक हिमांशु अग्रवाल के मुताबिक, 28 अप्रैल की रात बारिश शुरू होने पर बिजली चली गई। चार घंटे बाद भी बिजली नहीं आई तो 29 अप्रैल की भोर में जनरेटर चलाना पड़ा। दिन भर बिजली नहीं आई। यही हाल 30 अप्रैल को भी रहा। एक मई को कुछ देर के लिए बिजली आई पर टिकी नहीं। दो मई से बिजली आने लगी है, लेकिन दिन भर में 15-20 बार ट्रिपिंग हो रही है। इससे उपकरण खराब होने की आशंका बढ़ी है। यूनिट संचालन के लिए 20 किलोवाट क्षमता का कनेक्शन लिया है। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जनरेटर भी रखा है। दो दिन से ज्यादा बिजली गुल रहने पर शिकायत की तो एसडीओ ने फोन बंद कर लिया। जनरेटर चलाने पर रोज 12 हजार रुपये खर्च हुए। सेंटर पर माइनस 17 डिग्री पर 50 लाख का माल भंडारित है। अगर चूके तो भारी घाटा होगा।
हरूनगला से होती है ट्रांसपोर्ट नगर में बिजली आपूर्ति
ट्रांसपोर्ट नगर में बिजली आपूर्ति करीब 15 किमी दूर स्थित हरूनगला उपकेंद्र से होती है। इससे आए दिन पेडों की डाल या टहनी गिरने से ट्रिपिंग, फाॅल्ट होते हैं। यहां करीब डेढ़ सौ से अधिक ट्रक मैकेनिक व अन्य कारोबारी हैं जो इससे रोजाना जूझ रहे हैं। जबकि पांच किमी की दूरी पर नकटिया उपकेंद्र है। यहां से आपूर्ति हो तो यह अड़चन थमने की उम्मीद है। अगर पेड़ों की छंटाई करा दी जाए तो राहत के आसार हैं।
बिना बिजली चार घंटे तक नियंत्रित रहता है तापमान
कोल्ड स्टाेरेज एसोसिएशन के संरक्षक राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक, बिजली की अड़चन से कोल्ड चेन नियंत्रण के लिए रोज दस से 15 हजार रुपये का डीजल फुंक रहा है। सामान्य स्तर पर 200 केवीए का जनरेटर प्रयोग होता है। बिजली जाने पर अधिकतम चार घंटे कोल्ड चेन का तापमान नियंत्रित रहता है पर बिजली जाने का कोई समय तय नहीं है। अगर तापमान स्थिर न हो तो सब्जी, फल आदि खराब होने की आशंका रहती है।