बरेली। क्यारा विकासखंड के रहपुरा खजुरिया गांव की फरजाना और भोजीपुरा की शहनाज ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। उन्होंने जलकुंभी से उत्पाद बनाकर और मधुमक्खी पालन से शहद बेचकर आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। इन महिलाओं ने न केवल अपने परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा दी है।
जलकुंभी से हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण
फरजाना ने वर्ष 2022 में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जलकुंभी से उपयोगी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने तालाबों से निकाली जाने वाली जलकुंभी को संसाधित किया। इससे पर्स, योग मैट, टोकरी और सजावटी सामान जैसे हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करना शुरू किया। उत्पादों की गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइन के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ती गई। फरजाना का समूह अब नियमित रूप से उत्पाद तैयार कर बाजारों और प्रदर्शनियों में बेच रहा है। इससे समूह से जुड़ी महिलाओं की आमदनी बढ़ी है। समूह की प्रत्येक महिला हर माह उत्पाद बेचकर करीब 10 से 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही है।
मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन
शहनाज ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मधुमक्खी पालन को अपनाया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ''''या गौस'''' नाम से 10 महिलाओं का स्वयं सहायता समूह बनाया। इस समूह ने आधुनिक तरीके से शहद उत्पादन शुरू किया। धीरे-धीरे समूह का काम बढ़ता गया और आज शुद्ध शहद की बिक्री से अच्छी आय हो रही है। शहनाज ने बताया कि वे करीब दो साल से एक बाग में मधुमक्खी पालन कर रही हैं। समूह की हर महिला हर माह 10 से 20 लीटर शहद बेच रही है। प्रत्येक लीटर शहद की कीमत 400 से 500 रुपये के बीच है। इससे समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है और वे नियमित आमदनी अर्जित कर रही हैं।
वर्जन
जिले में 14785 स्वयं सहायता समूह संचालित है। तमाम समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर बेहतर कार्य कर खुद को सशक्त बनाया है। इन समूहों से ही प्रेरणा लेकर लगातार जिले में महिलाएं समूह से जुड़ रही है। - योगेंद्र भारती, डीसी एनआरएलएम