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Bareilly: 300 बेड के सरकारी अस्पताल को निजी हाथों में देने की योजना का विरोध, किसान एकता संघ ने किया प्रदर्शन

Tue, 27 May 2025 04:31 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली में किसान एकता संघ ने मंगलवार को धरना प्रदर्शन किया। संघ ने 300 बेड के सरकारी अस्पताल को पीपीपी मॉडल के तहत निजी हाथों में देने की योजना का विरोध किया। 
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किसान एकता संघ ने किया प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में 300 बेड के सरकारी अस्पताल को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत निजी हाथों में देने की योजना का किसान एकता संघ ने जोरदार विरोध किया है। संघ ने इस निर्णय को जनविरोधी बताते हुए इसे गरीब, मजदूर और किसान वर्ग के हितों के खिलाफ करार दिया है। इस मुद्दे पर संघ के कार्यकर्ताओं ने बरेली में धरना-प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ज्ञापन सौंपा। मंडलायुक्त से भी मुलाकात कर मांग रखी।

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किसान एकता संघ ने बताया कि इस अस्पताल की स्थापना के लिए संगठन ने छह महीने तक लगातार आंदोलन किया। इस दौरान संघ ने धरना, प्रदर्शन, जनसभाएं और कई बार प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपे। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मुफ्त और सुलभ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर संघ ने 26 मार्च 2025 से पदयात्रा निकालने का ऐलान किया था।

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हालांकि मुख्यमंत्री के बरेली दौरे को देखते हुए प्रशासन के आग्रह पर यह पदयात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद किसान एकता संघ का एक प्रतिनिधिमंडल बरेली के प्रभारी मंत्री और सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर से मिला था, जिन्होंने संगठन को आश्वस्त किया कि जनहित में यह योजना पूरी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने की थी मेडिकल हब बनाने की घोषण 
अप्रैल 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली दौरे के दौरान इस 300 बेड अस्पताल को मेडिकल हब बनाने की घोषणा की थी, जिससे क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें बेहतरीन चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी। लेकिन हाल की सुर्खियों के अनुसार सरकार अस्पताल को पीपीपी मॉडल पर निजी संस्थाओं को सौंपने पर विचार कर रही है। इससे संघ और आम नागरिकों के बीच गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।

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तो महंगा हो जाएगा इलाज 
किसान एकता संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस अस्पताल को निजी हाथों में देती है, तो यह गरीब, मजदूर और किसानों के साथ अन्याय होगा। संघ के मुताबिक, उनका संघर्ष इसीलिए था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। अगर यह अस्पताल निजी हाथों में चला गया, तो वहां इलाज महंगा हो जाएगा और गरीब तबका इससे वंचित रह जाएगा।
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आंदोलन की चेतावनी दी 
संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि पीपीपी मॉडल लागू किया गया, तो वे पुनः आंदोलन की राह पर लौटेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन की स्थिति में उत्पन्न होने वाले हालात की जिम्मेदारी पूरी तरह शासन और प्रशासन की होगी। इस पूरे मुद्दे पर बरेली की आम जनता का भी किसान एकता संघ को समर्थन मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और इस अस्पताल को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहकर संचालित करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक पारदर्शी और गरीबों के लिए सुलभ रहेंगी।

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