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क्रय केंद्रों पर किसानों को नहीं ठौर, बाजार में बिचौलियों का जोर

सार

किसानों के नाम पर सड़क से लेकर संसद तक अभी हाल ही में हल्ला, प्रदर्शन और आंदोलन हुए। हुक्मरानों ने किसानों की दशा सुधारने के लिए तमाम वादे और दावे किए, लेकिन धरातल की तस्वीर हुक्मरानों के दावों से एकदम जुदा है। सिस्टम के मकड़जाल में फंसे किसान का हक आज भी बिचौलिए छीन रहे हैं। सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, लेकिन जिले में सरकार की यह राहत किसानों के बजाय बिचौलियों की जेबों में जा रही है। किसानों की शिकायत है कि क्रय केंद्रों से उनका धान गीला बताकर लौटा दिया जा रहा है। नतीजतन तंगहाली में फंसा किसान अपना धान औने पौने दाम में बिचौलियों को बेचने को मजबूर हैं। अमर उजाला ने धान खरीद का जायजा लिया तो किसान देवचरा मंडी में अपना धान 1300 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचने को मजबूर दिखे। सफाई में अफसर कुछ भी क्यों न कहें, लेकिन सवाल सीधा सा है कि सिस्टम में खौट नहीं है तो फिर किसान 1868 के बजाए 1300 में अपना धान भला क्यों बेचेंगे। लेकिन एसी दफ्तरों में कैद अफसरशाही को क्रय केंद्रों पर सबकुछ ओके नजर आ रहा है।
 
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बरेली की देवचरा मंडी में धान बेचने पहुंचे किसान। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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धान गीला है कहकर क्रय केंद्रों से टरकाए जा रहे किसान, बाजार में बिचौलिए काट रहे जेब
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धान के लिए घोषित है 1868 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य, किसान 1300 रुपये तक देने को मजबूर
मंडी शुल्क और तुलाई के नाम पर भी लुट रहे किसान, दफ्तरों में बैठे अफसर बोले- सब ठीकठाक है

बरेली/भमोरा। तंगहाली से जूझ रहे किसानों ने धान उठने के साथ ही अगली फसल की तैयारी के लिए उसकी बिक्री शुरू कर दी है। मगर सरकारी क्रय केंद्रों पर धान गीला और तमाम दूसरी कमियां बताकर किसानों को लौटाया जा रहा है। इसके चलते हर वैरायटी के धान की देवचरा मंडी में भारी आवक हो रही है। तंगहाली से जूझ रहे किसान को तुरंत पैसा चाहिए ऐसे में बिचौलिए इसका फायदा उठाकर औने-पौने दामों में धान की खरीद कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी यहां कुछ ऐसा ही हुआ। बिचौलियों के आगे किसान लाचार नजर आए।
कोरोना संक्रमण के चलते किसानों को इस बार धान की फसल उगाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। रुपयों की समस्या आने पर तमाम किसानों ने कर्ज लेकर धान की रोपाई कर दी, सोचा था कि फसल आएगी तो कर्ज भी चुक जाएगा। फसल पकी तो किसानों को कुछ रुपये हाथ में आने की आस जगी। लेकिन सरकारी सिस्टम और बिचौलियों ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। लेकिन धान क्रय केंद्रों से किसानों को अलग - अलग बहानों से टरकाया जा रहा है। मजबूरी में किसान आढ़तियों और बिचौलियों के पास जाने को मजबूर हैं।

आसपास के कई जिलों से पहुंच रहा देवचरा मंडी में धान

बरेली। भमोरा थाना क्षेत्र स्थित देवचरा तराई क्षेत्र में धान की बड़ी मंडी है। सप्ताह में रविवार और बृहस्पतिवार को लगने वाली इस बाजार में बरेली के अलावा चंदौसी, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर समेत कई जिलों के हजारों किसान अपनी धान समेत अन्य फसलों की बिक्री को पहुंचते हैं। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा समेत कई प्रदेशों के राइस मिलर के एजेंट बने यहां के कुछ स्थानीय आढ़ती किसानों को मोटा चूना लगा रहे हैं। बृहस्पतिवार को दूर दराज से करीब 1500 ट्रॉलियों में धान भरकर किसान देवचरा मंडी पहुंचे। मगर यहां उन्हें बिचौलियों की मनमानी का सामना करना पड़ा। पिछले साल दो हजार रुपये से ऊपर तक बिकने वाला अच्छी किस्म का शरबती धान 1500 रुपये क्विंटल तक ही खरीदा गया। इसी तरह दो हजार रुपये क्विंटल बिकने वाले सुगंधा की खरीद 1300 रुपये प्रति क्विंटल रही। सरकारी केंद्रों पर 1868 रुपये में बिकने वाला मोटा धान 1300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया।

प्रति क्विंटल पर 17 रुपये का लगा रहे चूना

देवचरा मंडी में रोजाना हजारों क्विंटल धान की खरीद फरोख्त होती है। बृहस्पतिवार को मंडी पहुंचे लोगों ने बताया कि यहां सरकारी कीमत से कम दाम तो मिल ही रहा है ऊपर से 17 रुपये प्रति क्विंटल कटौती भी की जा रही है। इसमें 12 रुपये प्रति क्विंटल मंडी चार्ज और पांच रुपये क्विंटल धान की तुलाई के नाम पर वसूले जा रहे हैं।

मैं शरबती धान लेकर मंडी में आया हूं, पिछले साल यह धान 1850-1900 रुपये प्रति क्विंटल बेचा था। मोटे धान की सरकारी कीमत 1868 रुपये है लेकिन देवचरा मंडी में मेरा धान 1450 रुपये क्विंटल बिचौलियों ने खरीदा है। मैं क्रय केंद्र गया था लेकिन वहां गीला बताकर धान लौटा दिया गया। - भजन लाल, करतोली, बदायूं

मैं सुगंधा धान लेकर देवचरा मंडी लेकर आया हूं। यह धान मोटे धान की अपेक्षा काफी महंगा बिकता है। पिछले साल दो हजार रुपये क्विंटल तक बिका था लेकिन गुरुवार को बिचौलियों ने 1290 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत दी है। -नरेश पाल, तिलियापुर, सीबीगंज

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सरकारी केंद्र पर हाईब्रिड 1509 धान लेकर गए तो उन्होंने गीला बताकर लौटा दिया। गुरुवार को देवचरा मंडी में लेकर आए तो 1615 रुपये क्विंटल बिका है जबकि पिछले साल 2600-2700 रुपये क्विंटल तक बिका था। - शिशुपाल, सिकरोरी, बदायूं
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शरबती धान लेकर मंडी आया हूं। मोटे धाने की सरकारी कीमत 1868 है तो शरबती उससे महंगा ही बिकना चाहिए लेकिन देवचरा मंडी में बिचौलियों ने हमारा धान सिर्फ 1400 रुपये क्विंटल खरीदा है। - दिनेश यादव, सरदारनगर

जिले में बनाए थे 73 केंद्र, खरीद शून्य

खाद्य विभाग की ओर से जिले में धान खरीद के लिए 73 केंद्र बनाए गए हैं। एक अक्तूबर से कागजों में धान की खरीद शुरू कर दी गई लेकिन अब तक कहीं भी धान नहीं खरीदा गया है। किसानों का कहना है कि क्रय केंद्रों पर उनके धान को गीला बताकर लौटा दिया जा रहा है। उन्हें अगली फसल की तैयारी के लिए रुपयों की जरूरत है। ऐसे में वे आढ़तियों और स्थानीय बाजारों में धान बेचने को मजबूर हैं। वहां उन्हें समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत मिल रही है लेकिन सरकारी अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जिले में धान खरीद के लिए 73 केंद्र बनाए गए हैं। अब तक कहीं से कोई शिकायत नहीं आई है। अगर केंद्रों पर किसानों को कोई दिक्कत है तो शिकायत करें, कार्रवाई की जाएगी। - वीके सिंह, एडीएम प्रशासन

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