बड़ा बाईपास के लिए 13 बीघा जमीन अधिग्रहण में जाने के बावजूद अब तक मुआवजा न मिल पाने से परेशान चल रहे पदारथपुर गांव के किसान अब्दुल रसीद का बुधवार को निधन हो गया। परिवार वालों का कहना है कि टोल प्लाजा पर दो दिन धरने के बावजूद प्रशासन से मुआवजा के लिए कोई आश्वासन न मिलने से वह सदमे में आ गए थे। सुबह उनका निधन हो गया। धरने पर बैठकर आंदोलन कर रहे किसानों ने पदारथपुर पहुंचकर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। अंत्येष्टि में भी शामिल हुए। इसके बाद किसानों ने बृहस्पतिवार से अपना आंदोलन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में तब्दील करने का एलान कर दिया है। 55 वर्षीय अब्दुल रसीद के पास 19 बीघा कृषि भूमि थी। इसमें से 13 बीघा बड़ा बाईपास के लिए अधिग्रहण कर ली गई थी। इसके बाद उनके पास सिर्फ छह बीघा जमीन ही बची हुई थी। उनके पांच बेटे हैं, जिनके लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे की धनराशि से वह कहीं और जमीन खरीदना चाहते थे। उनके बेटे शकील ने बताया कि वर्ष 2006 में जमीन का अधिग्रहण किया गया था लेकिन प्रशासन की ओर से 2013 में सिर्फ 1.56 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से मुआवजा का भुगतान किया जा रहा था। इससे दूसरी जगह 13 बीघा की एक चौथाई जमीन भी नहीं खरीदी जा सकती थी इसलिए उनके पिता ने पुराना मुआवजा लेने से इंकार कर दिया था। बाकी किसानों की तरह उनको उम्मीद थी कि नई दरों पर मुआवजा का भुगतान हो जाएगा लेकिन कुछ न हो पाने से वह काफी समय से तनाव में थे। तीन अक्तूबर से फतेहगंज पश्चिमी में टोल प्लाजा के पास किसानों का धरना चल रहा है। अब्दुल रसीद उम्मीद लगाए हुए थे कि धरना पर प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन मिलेगा लेकिन नहीं मिला तो वह सदमे में आ गए। उनके बेटे का कहना है कि सदमे की वजह से उनके पिता का निधन हो गया। किसान नेता हरिनंदन सिंह समेत कई किसान उनकी अंत्येष्टि में शामिल हुए। हरिनंदन का कहना है कि पर्याप्त मुआवजा का भुगतान न होने से कई किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। बीमारी की दशा में उनके लिए इलाज तक को पैसे नहीं हैं इसलिए अब आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए बृहस्पतिवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। बता दें कि अखिल भारतीय किसान महासभा और बड़ा बाईपास किसान संघर्ष समिति के संयुक्त बैनर तले किसान सतुइया खास टोल प्लाजा पर किसान तीन दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन कर रहीं शहदपुर की सरबरी बेगम और कचौली बिथरीचैनपुर के श्यामलाल की हालत बुधवार को बिगड़ गई।