बरेली। जर्जर सड़कें, जलनिकासी की दिक्कत, अंधेरे में गुम गलियां और बंदरों के आतंक से फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र कराह रहा है। उद्यमियों की धड़कनें प्री-मानसून की बारिश ने बढ़ा दी है। फैक्टरियों में जलभराव की नौबत है। माल लदे ट्रक की आवाजाही में अड़चन से कारोबार खासा प्रभावित हो रहा है।
सरकारी राजस्व में करोड़ों रुपये का योगदान दे रहे फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र की अव्यवस्था ही पहचान बन चुकी है। पूर्व में लगे उद्योगों की हालत देखकर बड़े उद्योग इस क्षेत्र में आने को तैयार नहीं हो रहे। समस्याओं का मुद्दा उद्योग बंधु की बैठकों में कई बार उठा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। उद्यमियों के मुताबिक नवादा वन हरियाली बाजार की ओर चल रही फैक्टरियों में बारिश में जलभराव की समस्या हो जाती है। फैक्टरी के ग्राउंड और बेसमेंट में रखा कच्चा माल पानी भरने से खराब हो रहा है। सड़कों पर गड्ढे हैं, इससे हादसे का खतरा बना रहता है।
ट्रकों की आवाजाही प्रभावित है। वाहनों के पहिये कीचड़ में फंसने से सामान की लोडिंग और अपलोडिंग में मुश्किल आती है। वहीं, कर्मचारियों की आवाजाही जलभराव से प्रभावित होती है। स्ट्रीट लाइट न होने से शाम से अंधेरे में गुम औद्योगिक क्षेत्र में हादसे की आशंका रहती है।
जिला पंचायत सालाना वसूल रहा फीस, सुविधाएं नदारद
औद्योगिक क्षेत्र में व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिला पंचायत की है। सालाना जिला पंचायत की ओर से संचालित 250 उद्योगों से क्षेत्रफल के आधार पर 10 हजार से 50 हजार रुपये फीस ली जाती है, लेकिन मूलभूत सुविधा तक नहीं दे रहे। उद्यमी फीस देने से चूक जाए तो उन पर जुर्माना लगा देते हैं। इसकी कोई पूर्व सूचना भी नहीं देते। वहीं, समस्या बताई जाए तो कोई सुनवाई नहीं की जाती।
करीब 40 किमी में लगे हैं उद्योग, हैंडपंप तक नहीं लगे
नकटिया से फतेहगंज पूर्वी तक करीब 40 किमी में बसे क्षेत्र में कहीं हैंडपंप तक नहीं लगे हैं। कर्मचारियों, ट्रक चालक आदि को पीने के पानी तक नहीं मिलता। अधिकारियों का रवैया देख उद्यमियों ने खुद ही सबमर्सिबल पंप लगाकर पेयजल मुहैया करा रहे हैं। बता दें कि औद्योगिक क्षेत्र वर्ष 1980 में बसा था पर वर्ष 2006 में औपचारिक नामकरण हुआ था।
पेड़ों की छंटाई के नाम पर वन विभाग ने लिए 18 हजार
बिजली कटौती, फाॅल्ट ट्रिपिंग की समस्या की वजह बन रही पेड़ों की टहनियाें की छंटाई के लिए वन विभाग को निर्देश मिले। उद्यमियों का कहना है कि छंटाई सरकारी कार्य था, लेकिन इसके बदले 18 हजार रुपये वन विभाग ने जमा कराए। वहीं, माह भर पहले तत्कालीन जिलाधिकारी ने हाईवे पर स्ट्रीट लाइट प्रकरण पर एनएचएआई और उद्यमियों को ज्वाॅइंट सर्वे के निर्देश दिए थे, जो अब तक नहीं हुआ। ब्यूरो
मानसून में जलभराव, बिजली ट्रिपिंग से जूझेंगे उद्यमी
- कुछ घंटे की बारिश में ही बिजली आपूर्ति, जलभराव की समस्या है। कई फैक्टरियों में पानी भरने से कच्चा माल बर्बाद हो गया। विकास शुल्क लेकर भी हैंडपंप नहीं लगाए। स्ट्रीट लाइट के लिए सर्वे नहीं हुआ। - गुरप्रीत सिंह, अध्यक्ष, फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र
- बेहद खराब स्थिति है। पूरे क्षेत्र में सड़क, फैक्टरी पर जलभराव है। बड़े वाहनों का आवागमन प्रभावित है। अगर कोई ट्रक फंस जाए तो कई घंटे लोडिंग-अनलोडिंग थम जाती है। करीब ढाई सौ निर्माण इकाइयों का संचालन प्रभावित हो रहा है। - रजत मेहरोत्रा, सचिव, आईआईए
- उद्योग बंधु की बैठक में जो समस्या उद्यमी बताते हैं, उच्चाधिकारियों के दिशानिर्देश पर निराकरण कराया जा रहा है। हाल में एग्रो मिल की रोड ठीक कराई। सड़क, नाला निर्माण आदि के कई प्रस्ताव हैं जो बोर्ड बैठक में रखेंगे। उद्यमियों को अगर कोई और दिक्कत है तो वे उपायुक्त उद्योग को बता सकते हैं। - डॉ. नीतू सिसोदिया, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत