बरेली। जिले में कृषि यंत्र के नाम पर अनुदान में बड़े स्तर पर घपलेबाजी हुई है। यह गड़बड़ी एफपीओ (फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन)/सोसाइटी के नाम पर की गई है। अधिकांश एफपीओ/सोसाइटी में एक ही परिवार के लोगों के नाम हैं। कृषि यंत्रों के अनुदान में घपलेबाजी की यही वजह भी बताई जा रही है। चूंकि, उप निदेशक कृषि का भी कहना है कि अनुदान पर कृषि यंत्र खरीदकर बेचना एफपीओ में संभव नहीं है, क्योंकि एफपीओ किसानों का समूह है। ऐसा तभी हो सकता है, जब एफपीओ में विभिन्न किसानों के बजाय किसी एक परिवार के लोग शामिल हों और उस स्थिति में वह एफपीओ या सोसाइटी को फर्जी माना जाएगा।
फिलहाल, जांच अधिकारियों को कृषि यंत्र मौके पर न मिलने के मामले में जिन 28 लोगों के नाम से 22 लाख रुपये की वसूली के लिए आरसी जारी हुई हैं। उसमें 19 एफपीओ (फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन)/व्यक्तिगत नाम से सोसाइटी हैं। जिन्हें फार्म मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापना के लिए अनुदान पर कृषि यंत्र खरीदने में योजना से लाभान्वित किया गया। अब कृषि अधिकारियों का तर्क है कि इन 28 लोगों ने कृषि यंत्र खरीदे हैं। कुछ लोगों को एकल यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। चूंकि, अनुदान राशि का भुगतान बिल और संबंधित यंत्र के फोटोग्राफ्स मिलने पर ही किया गया है। ऐसे में स्पष्ट है कि यंत्र खरीदने के बाद बेच दिए गए। जिले में 134 एफपीओ (फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) हैं। इन प्रत्येक में 15 या इससे भी अधिक लोग सदस्य हैं। खबर है कि 80 प्रतिशत एफपीओ में जो भी किसान सदस्य दर्शाए गए हैं, उनमें एक ही परिवार के लोग हैं। यह लोग एफपीओ के नाम पर कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ भी ले रहे हैं। संवाद
एफपीओ में 10-15 से लेकर कई हजार की संख्या में किसान जुड़ सकते हैं, क्योंकि एफपीओ किसानों का समूह है। इसीलिए विभाग में विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने में एफपीओ को ही वरीयता दी जा रही है। कृषि यंत्र के प्रकरण जो भी सामने आए हैं, वह पूर्व के हैं। अब योजना के तहत यंत्रों में अनुदान राशि देने से पहले प्रक्रिया बहुत पारदर्शी हो चुकी है। - अमरपाल, उप निदेशक कृषि