सफेद एसयूवी खरीदकर बढ़ाया रुतबा, हूटर लगाया
विप्रा ने बताया कि दोनों बहनों ने काफी धन जमा कर लिया। फिर ठगी के धंधे में अपनी ममेरी बहन दीक्षा पाठक को भी शामिल कर लिया। दीक्षा कुंवारी है और उसके माता-पिता नहीं हैं। दीक्षा और शिखा ने लोगों को बताना शुरू किया कि विप्रा का प्रमोशन अब एसडीएम से एडीएम वित्त राजस्व पद पर हो गया है। तैनाती स्थल वह कभी गजरौला तो कभी अमरोहा बता देती थीं। ठगी के रुपये से इन्होंने करीब 27 लाख की एसयूवी खरीदी। इस कार पर बत्ती और हूटर लगाकर तीनों बहनें चलती थीं। कार पर आगे एडीएम एफआर भी लिखा था।
इंजीनियर पति से हो चुका तलाक
एएसपी ने बताया कि विप्रा की शादी बदायूं में केमिकल इंजीनियर से वर्ष 2017 में हुई थी। हालांकि, शादी ज्यादा दिन नहीं टिकी। वर्ष 2020 में उसने पति से तलाक ले लिया और पिता के घर ही रहने लगी। शिखा ने समाजशास्त्र से एमए किया है। उसकी शादी बरेली में ही हुई है और पति किसी कंपनी में मैनेजर है। दीक्षा ने शहर के निजी कॉलेज से एमएससी की है।
यूट्यूबर भी सिस्टर गैंग के संपर्क में, जांच शुरू
पुलिस को शक है कि इस गैंग में कुछ पुरुष सदस्य भी शामिल हैं। कुछ यूट्यूबर भी इनके सहयोगी बताए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन्हीं में से एक से इनका रुपये के लेनदेन का विवाद हो गया था। इसके बाद विप्रा व शिखा को कुछ लोगों ने ब्लैकमेल कर वसूली भी की। ऑनलाइन लेनदेन में भी इस तरह की गतिविधियां स्पष्ट हुई हैं।
ऐसे पकड़ी गई तीनों बहनें
आठ साल तक सिविल सेवाओं की तैयारी के बावजूद सफलता नहीं मिली तो विप्रा शर्मा खुद को आईएएस अधिकारी मान बैठी। खुद को एडीएम बताकर बेरोजगार युवाओं से कई लाख रुपये ठगने के आरोप में उसे और उसकी दो बहनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से 4.5 लाख रुपये नकदी, उप्र सरकार लिखी लग्जरी कर, सात चेकबुक, चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। उनके छह खातों में 55 लाख रुपये फ्रीज भी किए गए हैं।
एएसपी पंकज श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि प्रीति लॉयल व तीन अन्य लोगों ने बारादरी थाने में शिखा पाठक व उसकी बहन विप्रा शर्मा आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रीति लॉयल के मुताबिक शिखा ने उससे संपर्क बढ़ाया। उसने अपनी बहन डॉ. विप्रा शर्मा को गजरौला में तैनात अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बताया। दोनों बहनों ने सचिवालय में ऊंची पहुंच का दावा कर बेरोजागरों को कंप्यूटर ऑपरेटर व विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
प्रीति लॉयल ने अपने परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद को भी इस बारे में बताया। सरकारी नौकरी के लालच में इन सभी ने कई बार में करीब 11 लाख रुपये इन बहनों को दे दिए। इसके बाद विप्रा शर्मा ने आयुक्त एंव सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ अनुभाग-4 में तैनाती का फर्जी नियुक्तिपत्र बनाकर चारों लोगों को ई-मेल, डाक और वाट्सएप के जरिये भेज दिया। जब ये लोग नौकरी करने लखनऊ के विभूति खंड पहुंचे तो पता लगा कि नियुक्तिपत्र फर्जी हैं।
प्रीति की शिकायत पर बारादरी पुलिस ने रविवार को रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। छानबीन की तो पता चला कि खुद को आईएएस बताकर विप्रा अपनी कार पर एडीएम एफआर लिखवाकर और नीली बत्ती लगाकर रौब झाड़ती है। पुलिस ने सोमवार को ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी डॉ. विप्रा शर्मा, शिखा शर्मा और पवन विहार निवासी उनकी ममेरी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार कर लिया।