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थमा आंकड़ों का फर्जीवाड़ा तो 15 गुना घटी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग

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demo photo - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के एक-दो केस मगर संक्रमित के संपर्क में बताए जा रहे थे करीब 15 सौ लोग
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सक्रिय हैं 35 हाउसहोल्ड सर्वे टीमें, 15 सीएचसी और 18 पीएचसी का स्टाफ है शामिल

बरेली। कोरोना का कहर थमने के बाद शासन को भेजी जा रही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की रिपोर्ट में फर्जी आंकड़ेबाजी शुरू हो गई थी। शासन की नजर में अपने नंबर बढ़ाने के लिए एक-एक संक्रमित के संपर्क में 700-800 लोगों के आने के आंकड़े दर्शाए जा रहे थे। अमर उजाला ने जब इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया तो स्वास्थ्य विभाग की खासी फजीहत हुई। लिहाजा अब फर्जीवाड़े पर अंकुश लगने लगा है। शुक्रवार को जिले में दो संक्रमित मिले और उनके संपर्क में आने वाले 78 लोगों को ही ट्रेस किया गया है, जबकि पहले दो ही संक्रमितों पर करीब 15 सौ लोग संदिग्ध बताए जा रहे थे। उधर, हाउसहोल्ड सर्वे रिपोर्ट में फर्जीवाड़े को अफसर अब भी नकार रहे हैं।
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अप्रैल में शुरू हुई कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जून शुरू होते ही थमने लगी। मगर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयार हो रही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की रिपोर्ट में बड़े पैमाने में खेल हो रहा था। अमर उजाला ने इसकी प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। रिपोर्ट तैयार कर रहे स्टाफ से पूछताछ हुई। मामला शासन स्तर तक पहुंचा तो फर्जीवाड़े का खेल बंद हुआ। अब ट्रेसिंग रिपोर्ट के आंकड़ों में 15 गुना का अंतर आ गया है। शुक्रवार को मिले दो संक्रमित के संपर्क में 78 लोग ट्रेस हुए। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

यूं तैयार हो रही हाउसहोल्ड सर्वे रिपोर्ट

सीएओ डॉ. सुधीर गर्ग ने बताया कि हाउसहोल्ड सर्वे रिपोर्ट का डाटा 15 सीएचसी, 18 पीएचसी पर तैनात 1193 ग्राम पंचायत की 3200 आशा, 390 एएनएम और जिले के अलग-अलग इलाकों में तैनात दस मेडिकल मोबाइल वैन से मिल रहा है। यह ट्रैकिंग के साथ कोरोना के संदिग्ध लोगों की ट्रैकिंग, सैंपलिंग, उनके घर का सर्वे, टीकाकरण के प्रति प्रोत्साहित और कोरोना से बचाव के प्रति जागरूक कर रही हैं। लिहाजा, आरआरटी स्थगित होने पर भी टीमें सक्रिय हैं। इसलिए प्रतिदिन 20 से 22 हजार लोगों की स्क्रीनिंग हो रही है। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में जो गड़बड़ी थी वह दूर करा दी गई है।

ये होता है हाउस होल्ड सर्वे में

हाउसहोल्ड सर्वे में आशा, एएनएम, आरबीएसके, सीएचसी, पीएचसी पर तैनात कर्मचारी और स्वास्थ्य विभाग की अन्य टीमें अपने क्षेत्र के लोगों से संपर्क कर उनमें या उनके परिवार में किसी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण के लक्षण हैं या नहीं, इसका पता करती हैं। संक्रमण के लक्षण होने की जानकारी पर उनकी सैंपलिंग करने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर भेजा जाता है। साथ ही, स्वास्थ्य केंद्र को भी सूचना दी जाती है। अगर व्यक्ति किन्हीं कारणों से जांच कराने नहीं पहुंचता है तो उसके दिए पते और मोबाइल नंबर पर संपर्क किया जाता है। अगर शारीरिक तौर पर अक्षम है तो एमएमयू उसके घर जाकर सैंपल लेती है।

पोर्टल स्वगणना से दर्ज करा रहा था संदिग्ध

डीएम नितीश कुमार के मुताबिक, पोर्टल पर स्वगणना के आधार पर संदिग्ध दर्ज हो रहे थे। यानी जो संक्रमित के संपर्क में रहे हैं। डाटा दर्ज करने वाले स्टाफ से पूछताछ में पता चला कि पोर्टल पर अब तक मिले संदिग्ध (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में मिले) की संख्या में जब नई संख्या को जोड़ा जा रहा है तो वह स्वगणना से करीब चार से छह फीसदी लोगों को दर्ज कर रहा है। इसके स्थान पर नई संख्या दर्ज करने पर त्रुटि दिखा रहा है। ऐसे में इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यालय से संपर्क किया गया। उन्होंने निर्धारित स्वगणना के फार्मूला को हटाकर जानकारी दी। इसके बाद ट्रेस लोगों की संख्या दर्ज करने में कोई दिक्कत नहीं हुई।
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