बरेली। शहर में गंदगी और कूड़े के ढेर से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे ज्यादातर इलाकों में डेंगू, वायरल, डायरिया और टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग को 30 स्थानों पर डेंगू का लार्वा मिल चुका है। इसके बावजूद फागिंग को लेकन नगर निगम सजग नहीं हो रहा है। नगर निगम ने फागिंग के लिए बकायदा शेड्यूल बनाया है, लेकिन अधिकांश वार्डों में फागिंग करने वाली टीम पहुंच ही पहुंच नहीं रही है। अगर कहीं पहुंचती भी है तो फागिंग की खानापूरी करके लौट आती है। लापरवाही की बानगी तो यह है कि पूरे शहर में फागिंग का कार्य एक मशीन के सहारे ही चल रहा है। इससे लोगों में काफी नगर निगम के खिलाफ काफी रोष भी है।
नगर निगम ने 10 सितंबर से पांच अक्टूबर तक प्रतिदिन दो वार्डों में शाम 5.30 बजे फागिंग करने का शेड्यूल बनाया है। संबंधित वार्डों के पार्षद अपने इलाके में फागिंग होने का प्रमाण पत्र देंगे। 27 सितंबर की शाम तक 49 वार्डों में फागिंग कराने का दावे किए गए। जिन वार्डों में फागिंग हो चुकी है, वहां भी फागिंग मशीन महज खानापूरी करके ही लौट आई।
वार्ड 48 के पार्षद डॉ. अजय सक्सेना ने बताया कि पीरबहोड़ा में फागिंग मशीन नहीं पहुंची। यहां डेंगू से एक मरीज की मौत हो चुकी है। वार्ड चार के पार्षद अब्दुल जब्बार, वार्ड छह के पार्षद हरीशंकर, वार्ड 30 की पार्षद रीना ने भी फागिंग नहीं होने की बात कही। वार्ड 42 सुभाषनगर के पार्षद आलोक तायल का कहना है कि तीन वार्डों में मशीन एक घंटे फागिंग की खानापूरी करके चली गई। फाल्टूनगंज, कालीबाड़ी, गंगापुर, खुर्रग गौंटिया, कटरा चांद खां, आजाद नगर आदि इलाकों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
‘फागिंग में एक मशीन लगी हुई है। सोमवार से दो मशीनें और लगाई जाएंगी। जिन इलाकों में मच्छरों का प्रकोप ज्यादा है, वहां दोबारा फागिंग कराई जाएगी। अगर कोई कर्मचारी फागिंग में लापरवाही करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।’ डॉ. अशोक कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी