बरेली। वैसे तो सरकार ने राशन और खान-पान की जरूरी चीजों का उत्पादन करने वाले कारखानों को पाबंदी से अलग रखने को कहा है लेकिन कोरोना के खौफ के दौर में ये कारखाने भी पाबंदियों से नहीं बच पा रहे हैं। जनता कर्फ्यू के साथ जिले भर के जिन दो हजार से ज्यादा उद्योगों में ताला पड़ा है, उनमें 445 उद्योग-धंधे ऐसे भी हैं जिनमें खाने-पीने की चीजों और दवाओं का उत्पादन करते हैं। पुलिस की सख्ती से मजदूर और कर्मचारी इन फैक्टरियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
दो दिनों से जिले भर के सभी कारखानों में शटडाउन है। अनुमान जताया जा रहा है कि इस बंदी से सैकड़ों करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। बड़ी दिक्कत यह है कि प्रशासन की तरफ से कोई स्पष्ट व्यवस्था न बनाने की वजह से खाने-पीने की चीजों का उत्पादन करने वाले कारखाने भी बंद हो गए हैं जिसकी वजह से आने वाले दिनों में इन चीजों की कमी से एक नया संकट पैदा होने के आसार बन रहे हैं। शासन की ओर से पिछले दिनों जो गाइड लाइन जारी की गई थी, उसमें खाने-पीने के सामान का उत्पादन करने वाले कारखानों को लॉक डाउन से मुक्त रखने की बात कही गई थी लेकिन फिर भी स्टाफ और मजदूरों के न पहुंच पाने से ये कारखाने बंद पड़े हैं।
जनता कर्फ्यू के बाद मंगलवार की सुबह भी परसाखेड़ा की फैक्टरियों में पहली शिफ्ट में आने वाले लोगों को पुलिस ने दौड़ा दिया। इसके बाद आईआईए और चैंबर ऑफ कामर्स के पदाधिकारी डीएम नीतीश कुमार से मिले और उनसे जरूरी चीजों का उत्पादन करने वाले कारखानों को चालू रखने में आ रही समस्याओं को हल कराने का आग्रह किया। डीएम ने इसके बाद पुलिस को इन कारखानों में काम करने वाले स्टाफ को न रोकने की हिदायत दी। इसके बाद कुछ कारखानों में काम शुरू हुआ लेकिन चूंकि सुबह की शिफ्ट में काम करने वाले लोग घर लौट चुके थे लिहाजा नाममात्र का ही उत्पादन हो पाया।
जिले में औद्योगिक इकाईयां 2,000
श्रमिक और अन्य स्टाफ 50,000
फूड प्रोसेसिंग संबंधी उद्योग 445
कारोबार प्रतिदिन 250 रुपये करोड़
(आंकड़े लगभग में)
जनता कर्फ्यू के दिन से औद्योगिक इकाईयां बंद करा दी गई हैं। शासन ने खाद्य प्रसंस्करण, आवश्यक वस्तु, चावल, दवा, चीनी, आटा उद्योग चलवाने के आदेश दिए हैं। जिले भर में करीब दो हजार बड़ी छोटी इकाईयां हैं। बमुश्किल 50 कारखानों में काम हो पाया क्योंकि अभी तक फैक्ट्री में श्रमिक और दूसरे स्टाफ को पास जारी नहीं हुए हैं। प्रशासन इस पर गंभीर है, मंगलवार तक समस्या हल हो जाएगी। - आरआर गोयल, संयुक्त आयुक्त, उद्योग
दो दिन से जिले भर में सभी उद्योग बंद हैं। दैनिक उपभोग चीनी, आटा, खाद्य तेल, मसाले, ब्रेड, दवा, मिनरल वाटर, चावल आदि जरूरी वस्तुओं की उत्पादन ज्यादा दिन ठप रहने पर बाजार में उनकी किल्लत पैदा हो सकती है। इसलिए प्रशासन से आग्रह किया है कि खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्योग चलवाए जाएं। सोमवार को दोपहर बाद कुछ कारखाने चालू हो गए हैं। - दिनेश गोयल, आईआईए
श्रमिकों को मिलेंगे एक हजार रुपये
फैक्टरियों के बंद होने से प्रभावित हुए श्रमिकों को सरकार ने एक-एक हजार रुपये उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक अपना बैंक खाता और आईएफएससी नंबर ई-मेल अथवा व्हाट्सऐप पर दे दें। ग्राम प्रधानों से कहा गया है कि वे श्रमिकों का वितरण बैंक खातों के साथ व्हाट्सऐप नंबर 79052-24616 पर भिजवाएं ताकि उन लोगों के लिए एक हजार रुपये उनके खातों में भेज दिए जाएं। उद्योगों को यह हिदायत भी दी है कि काम पर न आने वाले श्रमिकों का वेतन न काटा जाए। - अनुपमा गौतम, उप श्रमायुक्त