आंवला। पक्का कटरा गली ठाकुरद्वारा स्थित श्री दुर्गा मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के उपलक्ष्य में रामानुजीय सत्संग मंडल के तत्वावधान में आयोजित श्री राम कथा के तीसरे दिन प्रभु महिला का वर्णन किया गया। कथा व्यास पंडित बृजेश पाठक ने कहा कि संसार के लोगों का स्वभाव होता है कि वे दुखी होकर हमारे हृदय की व्यथा सुन लेते हैं। बाद में हंसकर समाज में हमारी व्यथा को आनंदित होकर कह देते हैं। इससे हमें कोई लाभ तो होता नहीं उल्टे हमारी मान-प्रतिष्ठा अवश्य चली जाती है। इसलिए संत लोग संसार में अपनी व्यथा सुनाने के लिए हमें निषेध करते हैं। वह कहते हैं कि अपनी पीड़ा अपना दुख सुनाना है तो श्री हरि को सुनाओ। क्योंकि वही एकमात्र ऐसे हैं जो हमारी पीड़ा को सुनने के साथ-साथ उसका निवारण भी कर सकते हैं। फिर संसार के लोग तो कई बार सुनकर भी अनसुनी कर देते हैं। संवाद