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बजट से उम्मीदें::: गन्ने की लागत तो बढ़ी पर भाव नहीं, जिले के 1.92 लाख किसान निराश

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बरेली। गन्ने की लागत तो बढ़ी पर राज्य परामर्शी मूल्य नहीं बढ़ाया गया। भाव बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे गन्ना किसान और उनके संगठन निराश हैं। सरकार ने एलान कर दिया है कि अगले पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य पिछले पेराई सत्र की तरह 370 रुपये प्रति क्विंटल ही रहेगा। जिले में 1.92 लाख गन्ना किसान हैं। गन्ना चीनी मिलों को देते हैं। इन सभी को बढ़ती लागत के मद्देनजर 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की उम्मीद थी। लेकिन भाव नहीं बढ़ा। किसानों का कहना है कि जब महंगाई बढ़ी तो गन्ने का मूल्य क्यों नहीं बढ़ा।
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- गन्ना मूल्य न बढ़ाकर किसानों की अनदेखी की है। कम से कम 50 रुपये प्रति क्विंटल दाम बढ़ना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। - चौधरी नरेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष, सहकारी गन्ना समिति, बहेड़ी

- मजदूरी और लागत जोड़ने पर 450 रुपये प्रति क्विंटल का खर्चा है। किसानों को समृद्ध करना है तो 500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए। - राजेश पटेल, नवादा ब्रह्मनान, प्रगतिशील किसान
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- बड़े दुख की बात है दो साल से गन्ने का भाव नहीं बढ़ा। कम से कम 50 रुपये तो बढ़ ही जाते। श्रम मूल्य और दवाई की लागत बढ़ गई। -विनोद कटियार, इटौआ केदारनाथ, प्रगतिशील किसान
- सरकार का यह निर्णय उचित नहींं रहा। महंगाई के हिसाब हर साल गन्ने का दाम बढ़ना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया। -रवि नागर, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, किसान एकता संघ
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अमर उजाला ब्यूरो
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