बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में फार्मेसी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अमित वर्मा ने हर्बल लार्विसाइडल तैयार किया है। दार्जिलिंग में पाए जाने वाले पौधे वसनाभ (वैज्ञानिक नाम ए फेरोक्स) की जड़ से तैयार होने वाला यह लार्विसाइडल मौजूदा समय में प्रयोग हो रहे ऑर्गेनो फास्फेट, डीडीटी और बेंजामिन की अपेक्षा प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम के लार्वा के खात्मे में ज्यादा कारगर है। करीब साल भर चले शोध के बाद सफल परिणाम आने पर डॉ. अमित वर्मा ने इस हर्बल लार्विसाइडल का पेटेंट रजिस्टर कराने के लिए आवेदन किया है।
पिछले साल जिले में फैल्सीपेरम मलेरिया का प्रकोप हुआ तो हजारों लोग बीमार हुए और कई की मौत भी हो गई। इसके बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय में फार्मेसी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमित वर्मा ने बदायूं जिले की सीमा से सटे क्षेत्र मझगवां, आंवला, रामनगर आदि में सर्वे किया। स्वास्थ्य विभाग को यहां बड़ी तादात में फैल्सीपेरम के केस मिले थे। इसके बाद डॉ. अमित ने जनवरी 2018 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। शुरुआत में जड़ी-बूटी वाले कई पौधों से उन्होंने हर्बल लार्वी साइडल बनाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दार्जिलिंग में पाए जाने वाले वसनाभ पौधे पर काम शुरू किया। वसनाभ की जड़ के साथ उन्होंने चार तरह का एक्सटरेक्ट (अर्क) तैयार किया, जो मेथेनॉलिक, इथाइल, एसीटोन और क्लोरोफार्म के साथ बनाया गया था। इसके बाद इस मिश्रण को बारी-बारी से प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम के लार्वा वाले स्थानों पर छिड़काव किया गया, जिसमें सामने आया कि क्लोरोफार्म वाले एक्सटरेक्ट से सर्वाधिक लार्वा खत्म हुए।
प्रचलित लार्विसाइडल की अपेक्षा अच्छे परिणाम
डॉ. अमित वर्मा का दावा है कि उनका लार्विसाइडल पूरी तरह से हर्बल है इसलिए पर्यावरण को इससे कोई नुकसान नहीं है। इस समय फैल्सीपेरम मलेरिया का लार्वा नष्ट करने के लिए ऑर्गेनो फास्फेट, डीडीटी और बेंजामिन लार्वी साइडल प्रयोग किए जा रहे हैं। इनमें केमिकल होने के कारण पर्यावरण भी प्रभावित होती है। जहां इन लार्विसाइडल का छिड़काव होता है, उसके आसपास की घास भी जहरीली हो जाती है। साथ ही लंबे समय से चलन में होने के चलते मच्छरों में इन केमिकल की प्रतिरोधक क्षमता भी पैदा हो गई है। ऐसे में हर्बल लार्विसाइडल से पर्यावरण को नुकसान न होने के साथ ही यह फैल्सीपेरम का लार्वा नष्ट करने में ज्यादा कारगर भी साबित होगा। डॉ. अमित ने बताया कि उन्होंने शोध पेटेंट कराने के लिए आवेदन कर दिया है।