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जीएसटी भी खत्म नहीं कर पाई वाणिज्य कर विभाग में भ्रष्टाचार

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जीएसटी - फोटो : सोशल मीडिया
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राजेश अग्रवाल ने कहा- रेवेन्यू बढ़ाने के लिए भ्रष्टाचार का खात्मा जरूरी, सकते में आए विभाग के आला अफसर
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बरेली। एक देश एक कर प्रणाली भले ही देश भर में लागू हो गई है लेकिन वाणिज्य कर विभाग में अब तक भ्रष्टाचार बरकरार है। अफसर टैक्स चोरी करने वालों के मुरीद हैं और साफ-सुथरा काम करने वालों को प्रताड़ित करते हैं। विभाग सर्वाधिक कार्रवाई अपेक्षाकृत ईमानदार व्यापारियों पर ही करता है। आईवीआरआई के सभागार में बृहस्पतिवार को जीएसटी पर आयोजत मेगा सेमिनार में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा ले रहे प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने ही खुलकर यह आरोप लगाए गए तो वाणिज्य कर विभाग के अफसर सकते में आ गए।

पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि विभाग को अपना रेवेन्यू बढ़ाना है तो इसके लिए भ्रष्टाचार को शून्य करना होगा। उन्होंने सेमिनार में व्यापारियों को कम संख्या में बुलाने पर भी नाखुशी जताई। व्यापारी कल्याण बोर्ड के सरकार से नामित सदस्य पवन अरोरा ने कहा कि जो व्यापारी ईमानदारी से टैक्स अदा करते हैं, उनकी गाड़ियों को बार-बार चेक किया जाता है। टैक्स चोरी करने वालों की गाड़ियां कहीं नहीं रुकती हैं। उन्होंने कहा कि यह चिंता करने वाली बात है कि जीएसटी आने के बाद भी विभाग में भ्रष्टाचार बना हुआ है। कुछ व्यापारियों ने लोहा कारोबार में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कराए जाने का आरोप लगाया।
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सेमिनार में संयुक्त आयुक्त ज्योति स्वरूप शुक्ला और सहयोगी अधिकारी केके राय, श्रद्धा कुमारी ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन, रिटर्न ई-इनवायसिंग, रिफंड और ब्याज माफी प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। व्यापारियों के सवालों के भी जवाब दिए गए। सेमिनार में एडिशनल कमिश्नर आरके पांडे, एडिशनल कमिश्नर एके चतुर्वेदी, डीसी प्रशासन गौरी शंकर, असिस्टेंट कमिश्नर जेपी शुक्ला, राकेश गौतम, कारोबारी सुरेश सुंदरानी, सुदेश अग्रवाल, देवेंद्र जोशी, अमरजीत सिंह बख्शी आदि मौजूद रहे।
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