बरेली। तेजी से हो रहे शहरीकरण और औद्योगीकरण के बीच अभियंता बिजली की बढ़ती मांग का आकलन करने में नाकाम रहे। इसीलिए इस बार आपूर्ति व्यवस्था चौपट रही। अमूमन हर साल फीडरों और उपकेंद्रों के ऑडिट के बाद 15 से 20 फीसदी तक क्षमता वृद्धि की जाती है। इस बार भी अभियंताओं ने ऐसा ही किया, पर गर्मियों में बिजली की मांग 50 फीसदी तक बढ़ गई। लिहाजा, बिजली कटाैती ने पिछले कई साल के रिकाॅर्ड तोड़ दिए।
जगह-जगह फॉल्ट और ट्रिपिंग होती रही। बंच केबल फुंकते रहे। उपकेंद्र और ट्रांसफार्मर ओवरलोड होते रहे। इस साल ट्रांसफार्मरों के फुंकने का औसत भी बीते वर्षों के मुकाबले ज्यादा रहा। गर्मी शुरू होने से पहले जनवरी से अप्रैल तक कभी सुधारात्मक तो कभी क्षमता वृद्धि व स्मार्ट सिटी के कार्यों के नाम पर लगातार कटौती की गई।
अब नए सिरे से कवायद शुरू की गई है। बिजनेस प्लान 2024-25 के तहत अक्तूबर से दिसंबर तक ट्रांसफार्मरों व उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि समेत अन्य काम कराए जाएंगे। जनवरी से मार्च तक विद्युत निगम राजस्व वसूली पर जोर देगा। आरडीएसएस योजना के तहत शहर में पुरानी केबल बदलने का काम भी अब तक शत प्रतिशत नहीं हो सका है। पिछले काम अब तक पूरे नहीं हो सके हैं और अब विद्युत निगम ने नए बिजनेस प्लान की तैयारी शुरू कर दी है।
अभियंता भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि शहर में निर्बाध आपूर्ति के लिए कई काम बाकी हैं। कई उपकेंद्रों में 30-35 साल पुराने उपकरणों के सहारे काम चल रहा है। अधिशासी अभियंता सुरेश गौतम ने बताया कि ओवरलोडिंग बड़ी समस्या है। नई योजनाओं के जरिये इसे दूर करने की तैयारी है। फिलहाल, उपभोक्ताओं को अभी तीन महीने और कटौती व ट्रिपिंग का सामना करना पड़ेगा। संवाद
पहले के मुकाबले सुधार है। बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। नए उपकेंद्र बनाए जा रहे हैं। 220 केवी का साउथ सिटी उपकेंद्र अगले महीने शुरू हो जाएगा। पवन विहार में भी उपकेंद्र बनाया जा रहा है। कुछ स्थानों पर काम शेष हैं। इनको पूरा कराने के साथ नए काम भी कराए जाएंगे।- अंबा प्रसाद वशिष्ठ, अधीक्षण अभियंता