बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में एक इंजीनियरिंग संग्रहालय छात्रों के लिए प्रशिक्षण केंद्र बना हुआ है। यह संग्रहालय पिछले पांच वर्षों से उन पुरानी मशीनों को प्रदर्शित कर रहा है जो अब उपयोग में नहीं हैं, लेकिन छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देती हैं। इन मशीनों की कुल कीमत करीब 30 लाख रुपये है। ये म्यूजियम नैक मूल्यांकन के समय स्थापित किया गया था। मंगलवार को भी इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं का एक समूह म्यूजियम में रखे उपकरणों का अवलोकन करते दिखाई दिया। जानकारी ली तो पता चला कि ये वेस्ट टू बेस्ट के प्रयास स्वरूप एक प्रयास बना है।
डॉ. एमएस करुणा ने बताया कि यह संग्रहालय इंजीनियरिंग के सभी विद्यार्थियों को दिखाया जाता है। इससे वे मशीनों को करीब से जान पाते हैं और उनकी कार्यप्रणाली समझते हैं। छात्रों के अनुसार, यह संग्रहालय तृतीय वर्ष में उनके पाठ्यक्रम का हिस्सा बन जाता है। विभागाध्यक्ष ने बताया कि अन्य इंजीनियरिंग विभाग और स्कूलों के विद्यार्थी भी इसका दौरा करते हैं। संग्रहालय में 1998 की बनी कई मशीनें शामिल हैं। इनमें वेपर गैस डिफ्यूमिटी एप्रेटस, वाटर बाथ और सिम्पल स्टीम डिस्टिलेशन सेटअप प्रमुख हैं। यह संग्रहालय छात्रों को खराब हो चुकी मशीनों के माध्यम से इंजीनियरिंग सिद्धांतों को समझने का अवसर देता है। विद्यार्थी इन उपकरणों की संरचना और कार्यप्रणाली का बारीकी से अध्ययन करते हैं। यह उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं और मशीनरी के रखरखाव का ज्ञान देता है, जिससे उनकी सैद्धांतिक शिक्षा मजबूत होती है।
मशीनों को जानने का मिलता है अनुभव
- हमारी प्रयोगशाला दूसरी तरफ लगती है, लेकिन म्यूजियम में पहली बार आया हूं। मशीनों के बारे में जानना समझना अच्छा लगता है। ये मशीनें अगले सेमेस्टर में हमारे सिलेबस में आएंगी। - कुलदीप, छात्र
मैं भी यहां म्यूजियम देखने अपने साथियों के साथ आई हूं। इन मशीनों को सिलेबस में होने के कारण केवल किताबों में ही नहीं असल जीवन में भी उपयोग करके देख सकते हैं। इससे काम करने वाली मशीनों को नुकसान कम पहुंचता है। - नंदनी, छात्रा