बरेली। शहर में भीषण बारिश के बाद किला नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसके चलते कई कॉलोनियों में पानी घुस गया है। नदी पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण इसका मुख्य कारण है, जिससे इसकी चौड़ाई काफी कम हो गई है। जब अमर उजाला टीम ने प्रभावित क्षेत्रों को देखा तो असलियत सामने आई।
जलभराव से कर्मचारी नगर के आसपास की कॉलोनियां प्रभावित हुई हैं। इनमें सैदपुर हॉकिंस, लाजपतनगर, केसर वाटिका और त्रिवेणी एन्क्लेव शामिल हैं। निवासियों को अपने घरों की नींव कमजोर होने का डर सता रहा है। लाजपत नगर कॉलोनी के अध्यक्ष अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि 2010 में किला नदी की चौड़ाई 30 फुट थी। अतिक्रमण के कारण अब यह कहीं 10 तो कहीं 20 फुट ही रह गई है। इस अतिक्रमण से नदी नाले में बदल गई है। 2010 में किला नदी का जलस्तर बढ़ने पर कर्मचारी नगर के गोल चौक व आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंच गया था। वहीं 2021 में कर्मचारी नगर व बाकरगंज के कुछ क्षेत्रों में पानी पहुंच गया था। दोनों ही समय बारिश के पानी के चलते जलस्तर बढ़ा था। उस समय भी प्रशासन की तरफ से नदी किनारे बाढ़ क्षेत्र में घर बनाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 2010 और 2021 में भी किला नदी के जलस्तर बढ़ने से कर्मचारी नगर और बाकरगंज के कुछ क्षेत्रों में पानी पहुंचा था। उस समय भी प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए थे। हालांकि, कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अन्य नदियों पर भी अतिक्रमण
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि किला क्षेत्र में कटघर, स्वालेनगर, किला छावनी, मिनी बाइपास और बाकरगंज में नदी किनारे बड़े कॉम्प्लेक्स और कोठियां बनी हैं। इसी तरह नकटिया नदी पर भी अतिक्रमण है। यह डोहरा रोड, महानगर कॉलोनी, आशीष रॉयल पार्क, ग्रीन पार्क और बीसलपुर रोड पर है। बरेली विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान-2031 में रामगंगा और नकटिया नदी के किनारे 30 मीटर चौड़े ग्रीन बेल्ट का प्रावधान है।
प्रशासन की निष्क्रियता
सदर तहसील क्षेत्र में नदी किनारे अतिक्रमण वाले क्षेत्रों में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सदर उप-जिलाधिकारी की तरफ से भी इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया है। इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। वे लगातार निर्माण कर रहे हैं। यदि राजस्व टीम लेखपाल के साथ मिलकर नपाई करे, तो कई मकान अतिक्रमण की जद में आ जाएंगे।
केसर वाटिका की कॉलोनी में 70 फीसदी घर बगैर नक्शा पास व ऊंचाई पर बनाए गए है, जिससे आसपास की कॉलोनी का पानी यहां पर आ रहा है। यहां से लोग अपना सामान लेकर दूसरी जगह जा रहे हैं। वहीं किला नदी किनारे बसावट होने से पानी कॉलोनियों की तरफ से आ गया। -लवलीन अवस्थी, नागरिक।
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हम लोगों की गलती यह है कि हम सभी बीडीए अप्रूव कॉलोनी में रहते हैं। इस वजह से आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने मनचाहे तरीके से ऊंचाई में घर बनवा लिए। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नदी किनारे बसने वाले घरों व कॉलोनियों के खिलाफ अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। -केएन जोशी, नागरिक।
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मेरी कॉलोनी में 300 घर होंगे। यह 150 मीटर लंबी व 100 मीटर चौड़ी कॉलोनी है। आसपास की कॉलोनियां अपना घर ऊंचाइयों में बना रहे हैं। लोग का नदियों किनारे बसावट होने से यह स्थिति हो रही है।- अभिषेक सक्सेना, नागरिक
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नदी किनारे 100 मीटर की दूरी पर किसी प्रकार का निर्माण नहीं होना चाहिए। यह बरसाती नदी हैं, इसमें बारिश का ही पानी आता है। इसके पहले भी 2021 में कर्मचारी नगर क्षेत्र की कुछ कॉलोनियों में जलभराव हुआ था। - नीरज लांबा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
वर्जन ...
कर्मचारी नगर क्षेत्र में लाजपत नगर, केसर वाटिका आदि कॉलोनियों में नदी का पानी निकासी में दो दिनों का समय लग जाएगा। जलस्तर कम होने पर राहत मिलेगी। फिलहाल नगर निगम की टीम टैंक के माध्यम से पानी निकासी कर रही है। जल निकासी के बाद नगर निगम व सिंचाई विभाग की टीम मिलकर अतिक्रमण वाले हिस्से को चिह्नित करके कार्रवाई करेगी। -संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त, नगर निगम