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UP: अलकेमिस्ट से बरेली की रबर फैक्टरी का मालिकाना हक छिना, कर्मचारियों ने जताई खुशी, आसान होगी भुगतान की राह

Fri, 22 Dec 2023 10:24 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

वर्ष 1999 से बंद पड़ी रबर फैक्टरी पर अलकेमिस्ट का दावा खारिज होने पर कर्मचारियों ने खुशी जताई है। फैक्टरी जिस समय बंद हुई थी, 1,432 कर्मचारी कार्यरत थे। इनके वेतन और फंड के 600 करोड़ रुपये फैक्टरी पर बकाया है
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रबर फैक्टरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली के फतेहगंज पश्चिमी में 24 वर्षों से बंद पड़ी रबर फैक्टरी पर अलकेमिस्ट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी का मालिकाना हक नहीं होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यूपी सरकार का पक्ष सुनने के बाद पूर्व में दिए अपने फैसले को खारिज कर दिया है। इससे मालिकाना हक का फैसला राज्य सरकार के पक्ष में होने की उम्मीद भी जगी है।

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वर्ष 1999 में फैक्टरी बंद होने के बाद राज्य सरकार ने उसकी भूमि पर कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू कराई थी। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम को नोडल एजेंसी नामित किया था। वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट में अलकेमिस्ट कंपनी ने फैक्टरी की 1380.2 एकड़ भूमि, प्लांट, भवन, मशीनों पर दावा किया था। 

राज्य सरकार की कमजोर पैरवी से बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 अक्टूबर 2020 को अलकेमिस्ट कंपनी को फैक्टरी की भूमि पर कब्जा देने के आदेश दे दिए। 14 दिसंबर 2020 तक फैक्टरी की सारी संपत्ति अलकेमिस्ट को सौंपी जानी थी। तीन हजार वर्गमीटर भूमि हस्तांतरित होने के बाद प्रक्रिया रुकवा दी गई थी। तब यूपी सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। 

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कर्मचारियों ने जताई खुशी
रबर फैक्टरी पर अलकेमिस्ट का दावा खारिज होने पर कर्मचारियों ने खुशी जताई है। फैक्टरी जिस समय बंद हुई थी, 1,432 कर्मचारी कार्यरत थे। इनके वेतन और फंड के 600 करोड़ रुपये फैक्टरी पर बकाया है। बीते 24 वर्षों में इनमें से 600 लोगों की मौत हो चुकी है। 

रामपुर गार्डन स्थित जनऔषधि केंद्र में बृहस्पतिवार को बैठक कर कर्मचारियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। बॉम्बे हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए शासन-प्रशासन का आभार जताया। 

सिंथेटिक एंड केमिकल कर्मचारी यूनियन के महासचिव अशोक मिश्रा ने कहा कि 24 साल बाद कर्मचारियों के बकाया भुगतान का रास्ता साफ हुआ है। इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त ऑफिशियल लिक्विडेटर को सभी कर्मचारियों के दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं। 

16 जुलाई को लिक्विडेटर की ओर से कर्मचारियों के भुगतान को स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई थी। मालिकाना हक जिसे भी मिलेगा, वह कर्मचारियों का भुगतान करेगा। इस दौरान संगठन के आरसी शर्मा, प्रमोद कुमार, एसएन चौबे, शिवकांत, घनश्याम, एससी निगम, मौजूद रहे।

वाणिज्य कर विभाग व बैंकों की भी है देनदारी
प्रशासन के अनुसार फैक्टरी पर वाणिज्य कर विभाग के 134.51 करोड़ रुपये, श्रम विभाग के 17 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसके अलावा बैंकों की देनदारी के संबंध में संयुक्त आयुक्त उद्योग से रिपोर्ट मांगी गई। उनकी ओर से विभिन्न बैंकों को पत्र भेजे गए हैं पर अभी जिला प्रशासन के पास सटीक जानकारी नहीं है।

दोनों पक्षों की होगी सुनवाई
एडीएम वित्त एवं राजस्व संतोष बहादुर सिंह ने बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष को सुने बिना ही एकतरफा फैसला सुना दिया था। अब दोनों पक्षों को सुना जाएगा।

एम्स के लिए करूंगा पैरवी : मंत्री
वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार ने इसे बरेली के लिए उपलब्धि बताते हुए सरकार और अधिकारियों के प्रयास को सराहा। कहा कि इस जमीन का उपयोग इंडस्टि्रयल हब बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इस जमीन पर एम्स बनाने के लिए शासन को पत्र लिखूंगा। इसके लिए खुद मुख्यमंत्री से मिलकर सिफारिश करूंगा।

बीएसएफ कैंप, हाईवे के लिए दी जा चुकी है भूमि
मैसर्स सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड (रबर फैक्टरी) को वर्ष 1960 में 1380.23 एकड़ भूमि राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। फैक्टरी बंद होने के बाद वर्तमान में 1256.65 एकड़ भूमि अवशेष है। 
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वर्ष 1982 में बीएसएफ कैंप स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को 11,300.08 रुपये का भुगतान कर 100 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। राष्ट्रीय राजमार्ग-24 के चौड़ीकरण के लिए भी वर्ष 2008-09 में 9.3746 हेक्टेयर भूमि अर्जित की गई थी। प्रतिकर के रूप में मिले 4.22 करोड़ रुपये परियोजना निदेशक एवं विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के संयुक्त खाते में जमा हैं।
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