मीरगंज/शाही। बृहस्पतिवार शाम तक दोनों हाथी परचई में थे। रात को वे उत्तराखंड की दिशा में कुछ आगे जरूर बढ़े लेकिन फिर वापस लौटकर गर्मी से राहत पाने के लिए पीला खार नदी में घुस गए। इसके बाद नदी पार कर दोनो हाथी ग्राम धनेली, दुनकी, बकैनियां, वीरपुर, मडवा, बंशीपुर, बलाई, पहाड़पुर, नरखेड़ा होते हुए करीब दस किमी की दूरी तय कर भोर होते खानपुर तक पहुंच गए। यहां इन्हें गन्ने का खेत और पेड़ों के झुंड की छाया पसंद आ गई तो वहीं रुक गए। शुक्रवार सुबह से शाम तक कई खेतों में उन्होंने घूम-घूम कर गन्ना खाया। खेत के बाहर आकर भी टहलते रहे। किसान लक्षमण के खेत में लगी धान की पौध को भी आहार बनाया। वन विभाग की टीम व कुछ अधिकारियों ने हाथियों की इस चहलकदमी को अपने मोबाइल व कैमरों में भी कैद किया।
गांव में किए रोकने के इंतजाम
शाही। हाथियों का रुख गांव की तरफ न हो इसके लिए वन विभाग की टीमों ने गांव के चकरोड पर कई जगह धुआं करने के लिए गोबर के कंडों के ढेर भी लगा दिए हैं। मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने बताया कि हाथी गांव की ओर यदि रुख करते हैं तो उन्हें इससे रोका जा सकता है। रात में पटाखों और कनस्तरों को बजा कर हाथियों को गांव से दूर रखने की भी कोशिश की जाएगी।
लोगों ने बच्चों को नहीं भेजा स्कूल
शाही। खानपुर में हाथियों की मौजूदगी जिस खेत में है, वहां से गांव का प्राथमिक विद्यालय बमुश्किल 200 मीटर की दूरी पर है। हाथी के आने की दहशत इस स्कूल के बच्चों और उनके अभिभावकों में भी दिखाई दी। अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। सुबह इक्का-दुक्का बच्चे ही स्कूल पहुंचे। एबीएसए के निर्देश पर एनपीआरसी ने स्कूल पहुंचकर शिक्षक को उनकी सुरक्षा के निर्देश दिए।