1000 और 500 रुपये के नोट बिजली और टेलीफोन बिल में जमा करने की छूट मिलने से बकाएदारों में जोश दिख रहा है। पुरानी करेंसी से बकाया बिल जमा करने की तारीख भी बढ़ गई है। बिजली विभाग ने अवकाश रद कर विशेष काउंटर लगवाए हैं, लेकिन बीएसएनएल इस मामले में उदासीन दिखा।
बिजली विभाग जिले भर में एक माह में औसतन 30-35 करोड़ रुपये का ही राजस्व जुटा पाता है। इस माह बड़े नोट अचानक बंद होने से बकाएदार और विभाग दोनों ही प्रभावित हो गए। शोर मचा तो 11 नवंबर से बिजली और शनिवार 12 नवंबर से बीएसएनएल में बकाया बिल पुरानी करेंसी से जमा करने की अनुमति मिल गई। बिजली चीफ इंजीनियर राजकुमार अग्रवाल ने शनिवार, रविवार और सोमवार का अवकाश रद करते हुए मंडल भर में अतिरिक्त कलेक्शन काउंटर खुलवा दिए और दर्जन भर मोबाइल वैन भी दौड़ा दीं। प्रतिबंधित करेंसी बिजली बिल में जमा करने की अनुमति मिलने पर 11 से 14 नवंबर तक रिकार्ड 18 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। विभागीय अफसर बताते हैं कि शहरी उपभोक्ताओं ने 15 करोड़ और ग्रामीण बकायेदारों ने सवा तीन रुपये करोड़ रुपये जमा किए हैं। इस तरह चार दिनों में 18 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया राजस्व जमा हो चुका है। एसई शहर मनोज पाठक ने बताया कि 24 नवंबर तक पुरानी करेंसी से बकाया जमा कराया जा सकता है। उधर, बीएसएनएल ने काउंटर ही नहीं खुलवाए, इससे लोग परेशान रहे।