मध्यांचल विद्युत निगम में एचसीएल नाम की निजी कंपनी की ओर से बिलों में की गई करोड़ों की हेराफेरी की आंच बरेली तक पहुंच गई है। यहां तीन साल पहले निजी बिलिंग कंपनी एन साफ्ट ने ग्रामीण विद्युत वितरण खंड में हजारों बिलों में राजस्व कम कर करोड़ों रुपये का चूना लगाया था। अमर उजाला ने इस खेल को उजागर किया था लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। राजधानी लखनऊ में जब बड़ा घोटाला सामने आया तो बरेली में भी जांच तेज हो गई है। इससे विभाग में अफरातफरी मची हुई है।
वर्ष 2011-12 में ग्रामीण विद्युत वितरण खंड द्वितीय में कार्यरत निजी बिलिंग कंपनी एन साफ्ट ने हजारों लोगों के बिलों में मनमाफिक तरीके से रकम कम कर दी। इस गोरखधंधे में अधिशासी अभियंता आदि अफसरों के पासवर्ड इस्तेमाल हुए। बताया जाता है कि कंपनी ने विभागीय मिलीभगत से तीन करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व चोरी की। इसे अमर उजाला ने साल भर पहलेे उजागर किया तो विभागीय अफसरों ने लीपापोती के लिए जांच टीम बना दी। टीम ने आज तक आख्या तक नहीं दी और कंपनी काम समेट कर चुपचाप खिसक गई। विद्युत मजदूर संघ ने मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचाया तो धीमी गति से जांच शुरू हुई। इस बीच लखनऊ में एचसीएल कंपनी ने बड़ा कारनामा कर दिया। इससे बरेली में हुए घपले की जांच भी तेज हो गई है।
एन साफ्ट और विभागीय गठजोड़ से कंप्यूटर से बिल कम करने की जांच में अचानक तेजी आने से विभाग में खलबली मची हुई है। नए चीफ इंजीनियर वीके शर्मा ने भी इसका जायजा लिया है। लखनऊ से आए एसई तकनीकी पंकज श्रीवास्तव आदि ने विद्युत वितरण खंड पहुंचकर रिकार्ड तलाशा। अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता ने बताया कि जांच टीम ने जो अभिलेख मांगे थे वह उपलब्ध करा दिए हैं।
22 हजार बिलों में हेराफेरी
विद्युत वितरण खंड द्वितीय में अभी सिर्फ 22 हजार संदिग्ध बिल मामले जांच दल के हाथ लगे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 22 हजार बिलों में हुई हेराफेरी की रिपोर्ट मांगी है। इन बिलों में करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व चोरी किया गया है। बताया जाता है कि ज्यादातर अभिलेख गायब हैं। कंपनी से वांछित रिकार्ड मांगा था जो नहीं दिया गया।