कागजों में मात्र तीन घंटे कटौती हुई है। जबकि शहर के अधिकांश इलाकों में पूरे दिन सप्लाई ठप रही। बताया जाता है कि स्काडा योजना के तहत काम कर रही निजी कंपनी की मनमानी और लापरवाही के चलते बिना किसी पूर्व सूचना के शट डाउन ले लिए गए। जिसके कारण भर लोग गर्मी में बिलबिलाते रहे और पानी को तरस गए। विभागीय अफसरों को इसकी कोई जानकारी नहीं है कि निजी कंपनी की ओर से किस स्थान पर कितने घंटे सप्लाई बंद कराई, अथवा शट डाउन लिया।
बुधवार में विभागीय अभिलेखों के अनुसार तीन दौर में सिर्फ तीन घंटे कटौती हुई। देर शाम कंपनी बाग के पास तार टूटने से शाहदाना केंद्र घंटाें ठप रहा। रोहिली टोला स्थित खंभा नंबर जे 14 से पोषित इलाकाें में तीसरे दिन भी सप्लाई बाधित रही। सिविल लाइंस, शास्त्रीनगर, राजेंद्रनगर, संजय नगर, पुराना शहर, पंचशील कालोनी, सैनिक कालोनी, सीबीगंज, बिहारीपुर, मलूकपुर, केलाबाग, इज्जतनगर समेत दर्जनों स्थानों पर निजी कंपनी केईआई ने बिना किसी सूचना के शटडाउन लेकर दिन भर खंभे लगाने और तार बिछाने का काम कराया। इन इलाकों में दोपहर को गई बिजली शाम को पांच बजे के बाद आई। सबसे व्यस्त बाजार श्यामगंज, कालीबाड़ी, सिकलापुर आदि इलाकों में शाहदाना जेई ने वरिष्ठ अफसरों को सूचित किए बगैर कंपनी स्टॉफ को शटडाउन दे दिया। परेशान लोगों ने अधिशासी अभियंता नंदलाल और एसडीओ राजेंद्र कुमार सिंह को फोन घुमाए तो इन अफसरों ने बताया कि सप्लाई सामान्य चल रही है। जब छानबीन हुई तो पता चला कि जेई ने चुपचाप शटडाउन दे दिया है। अधिशासी अभियंता नंदलाल ने कहा है कि मनमानी करने वाले जेई के खिलाफ कार्रवाई होगी।
- शाहदाना ठप
बुधवार देर शाम गांधी उद्यान के पास हाईटेंशन लाइन टूट गई। इस लाइन से शाहदाना उपकेंद्र पोषित है, इसलिए उपकेंद्र ठप हो गया। इससे कांकर टोला, रोहिलीटोला, रबड़ीटोला, काजीटोला, माधोबाड़ी, मॉडलटाउन, गंगापुर, नई बस्ती, सैलानी, श्यामगंज, कालीबाड़ी, सिकलापुर, मठचौकी, समेत दर्जनों इलाके रात 11 बजे तक प्रभावित रहे। सप्लाई गुल होने से परेशान लोगाें ने जेई को फोन मिलाया तो फोन बंद था।
एसई बदले गए
बरेली। अधीक्षण अभियंता शहर एनके श्रीवास्तव का तबादला उनके अनुरोध पर कर दिया गया है। उनकी जगह अभी नए एसई की तैनाती नहीं हो पाई है। उनका प्रभार एसई ग्रामीण देख रहे हैं। इसलिए शहर की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई है । ऐसे में स्काडा योजना के तहत काम करने वाली निजी कंपनियों पर अंकुश नहीं रहा है।