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पब्लिक की मार नहीं खाएंगे, सुरक्षा दो

Wed, 28 Jan 2015 01:40 AM IST
बरेली
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शासन के सख्त आदेश के बाद भी बिजली चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बिजली विभाग को पुलिस और प्रशासन की मदद नहीं मिल पा रही है, न सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि बिजली विभाग को डूबने से बचाया जा सके। मंगलवार को विद्युत अभियंता संघ की बैठक में सरकार की नीतियों की जमकर बखिया उधेड़ी गई। चेकिंग टीमों पर होने वाले हमलों को सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा गया कि बिजली चोरी कर रहे 30 फीसदी लोगों पर कार्रवाई के लिए सरकार की कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
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विद्युत अतिथि गृह पर आयोजित बैठक में चेकिंग टीमों पर हमले और बिजली चोरी के मामलों में ठोस कार्रवाई न किए जाने का मुद्दा उठाया गया। अभियंता संघ के प्रदेश अध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि सरकार बिजली और विभाग नाममात्र के स्टाफ  से बिजली सप्लाई में गुणात्मक सुधार कराना चाहता है जो संभव नहीं हैं। संघ के दूसरे नेताओं ने कहा कि यूपी में नई ऊर्जा नीति पूरी तरह फ्लाप है। निजी कंपनियां और भ्रष्ट तंत्र मौज कर रहा है। विद्युत उपभोक्ता बेहाल हैं जबकि बिजली चुराने वाले मस्ती में हैं। चेकिंग टीमों का मनोबल तोड़ने के लिए हमले किए जा रहे है। तीस प्रतिशत से ज्यादा लोग बिजली चोरी कर रहे हैं लेकिन उन पर ठोस कार्रवाई के लिए कोई स्पष्ट नीति तक नहीं बनी है। चेकिंग प्रक्रिया भी पारदर्शी नहीं है। इससे वास्तविक उपभोक्ता ही प्रभावित हो रहे हैं।
अभियंता संघ के अध्यक्ष ने कहा कि चेकिंग टीमों पर जब भी कोई हमला या विवाद होता है तो स्थानीय पुलिस कभी सहयोग नहीं करती है। बिजली चोरों की तहरीर पर झूठा मामला दर्ज हो जाता है जबकि चेकिंग टीम अपनी रिपोर्ट लिखवाने के लिए भटकती रहती है। उन्होंने मांग की कि चेकिंग टीम पर हमला करने वालों पर गुंडा एक्ट लगाया जाए। चेकिंग टीमों को पीएसी और आरएएफ उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार निजी कंपनियों का हित साधने में लगी है। इन कंपनियाें को सस्ती दर पर बिजली मिलती है जबकि उपभोक्ताओं से पूरा बिल वसूला जा रहा है। हर ओर मनमानी, पक्षपात और भ्रष्ट माहौल है जिससे स्टाफ का मनोबल गिर रहा है। उन्होंने खाली पदों पर जल्द भर्ती करने पर भी जोर दिया। सभा का संचालन स्थानीय शाखा प्रमुख रंजीत चौधरी ने किया। जोनल चीफ इंजीनियर एनसी अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में एचपी गुप्ता, वीके  चंदोला, नीरज यादव, संजीव वैश्य, सत्यार्थ गंगवार और पीके सिंह आदि ने कहा कि मुनाफे का निजीकरण और घाटे का सरकारीकरण पर तुरंत रोक लगाने को नयी ऊर्जा नीति की समीक्षा विशेषज्ञों की समिति से करायी जाए। साथ ही विद्युत अधिनियम 2003 में प्रस्तावित संशोधन वापस लिए जाएं।
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