विवाद और नाराजगी के बाद आखिरकार जिला अस्पताल के बुजुर्ग डॉक्टरों की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगा दी गई है। एक महीने में तीन बार डॉक्टर अपनी ओपीडी के बाद पोस्टमार्टम करने जाएंगे। इसमें वे डॉक्टर भी शामिल कर लिए गए हैं, जिनका रिटायरमेंट पांच माह बाद है। एक डॉक्टर ने तो लिखित में पोस्टमार्टम ड्यूटी करने से मना कर दिया है। कुछ जूनियर डॉक्टराें को सिर्फ पैनल के लिए रखा गया है।
शासन के निर्देश पर पीएचसी, सीएचसी के साथ सभी उम्र के डॉक्टरों को पोस्टमार्टम ड्यूटी में लगाने को कहा गया है। जनपद में पीएचसी और सीएचसी के डॉक्टरों को इससे दूर रखा गया है। ड्यूटी में अधिकतर डॉक्टर जिला अस्पताल के शामिल किए गए हैं, इनमें सबसे अधिक संख्या में 55 साल की उम्र पूरी कर चुके डॉक्टर शामिल हैं। विरोध कर रहे डॉक्टराें का कहना है कि जब सभी उम्र के डॉक्टरों को लेने की बात है तो पहले जूनियर डॉक्टरों को लिया जाए, लेकिन सारी की सारी ड्यूटी 55 साल से अधिक उम्र के डॉक्टरों की लगाई गई है। हालांकि बताया जा रहा है कि 55 साल से अधिक के डॉक्टर और सीएमओ कार्यालय के डॉक्टराें को सिर्फ विशेष परिस्थितियों पर ड्यूटी में लगाया जाएगा।
सीएमओ कार्यालय के डॉक्टर सबसे पीछे
सीएमओ कार्यालय में तैनात डॉक्टरों को सबसे पीछे थर्ड प्रायोरिटी में रखा गया है। इसमें भी चार डॉक्टर, डॉ. मनोज शुक्ला, डॉ. रमेश चंद्र, डॉ. एसएस चौहान और डॉ. आरएन गिरी शामिल हैं।
इनकी लगी है ड्यूटी
डॉ. एमएल शर्मा, डॉ. एसके सागर, डॉ. राजकुमार, डॉ. टीएस आर्या, डॉ. वीके धस्माना, डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. वागीश वैश्य, डॉ. यूवी सिंह, डॉ. एके गुप्ता।
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी है। इसलिए सभी को पोस्टमार्टम ड्यूटी पर नहीं लगाया जा सकता। नए आदेश के तहत जिनकी ड्यूटी लगी है उनको आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सेकेंड और थर्ड प्रायोरिटी में लगाए गए डॉक्टर सिर्फ विशेष परिस्थिति के लिए हैं।
- डॉ. सुबोध शर्मा, एडी हेल्थ