करंट से मरे लकड़ी कारीगर को उसके घरवालों ने करंट लगाकर ही जिंदा करने की कोशिश की। मौके पर पहुंचे दरोगा ने ऐसे करने से रोका तो गुस्साए घरवाले उनसे उलझ गए। किसी तरह इन्हें हटाया गया, हालांकि इन्होंने शव का पोस्टमार्टम फिर भी नहीं कराया।
फतेहगंज पश्चिमी के गांव रुकुमपुर माधोपुर निवासी हसनैन यहां बिधौलिया में रईस अहमद की लकड़ी टाल पर काम करता था। बृहस्पतिवार पूर्वान्ह 11 बजे वह ड्रिल मशीन से लकड़ी में छेद कर रहा था। तभी तार पानी के संपर्क में आने से मशीन पर करंट उतर आया और हसनैन की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर थोड़ी ही देर में हसनैन के परिवार वाले और ग्रामीण आ गए। हसनैन के जिंदा होने की आस में वे उसे एक नजदीकी अस्पताल में ले गए। वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद घरवाले हसनैन का शव वापस टाल पर ले आए। किसी ने कहा कि ऐसे मामलों में मौत के तरीके को दोहराने पर व्यक्ति के जिंदा होने की संभावना रहती है। तब घरवालों ने शव को दोबारा करंट लगाना शुरू किया। इस बात की जानकारी पुलिस को मिली तो एसआई अनिल सिरोही मौके पर पहुंच गए। उन्होंने लोगों से ऐसा करने को मना किया तो वे सिरोही से उलझ गए। सिरोही ने अलग हटकर इंस्पेक्टर देवेंद्र चौधरी को स्थिति की जानकारी दी। थोड़ी देर में इंस्पेक्टर के साथ परसाखेड़ा चौकी का स्टाफ मौके पर पहुंच गया। वहां पुलिस ने इन लोगों को हटा दिया और शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही। इस बार हसनैन की मां सोहरा और अन्य महिलाएं आड़े आ गईं। उन्होंने कहा कि वे लोग किसी कीमत पर पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। हालांकि अब शव को सुपुर्देखाक कर देंगे। काफी समझाने पर भी यह लोग नहीं माने। तब पुलिस ने लिखित औपचारिकता के बाद इन्हें शव ले जाने दिया।