सेंथल। मुहर्रम पर चल रही अजादारी के क्रम में बृहस्पतिवार को अकीदतमंदों ने हजरत अब्बास की शहादत पर आंसू बहाए। इमामबाड़ा कला से कदीमी फतेह निशान का जुलूस-ए-अलम उठा। जिसकी ज्यारत के लिए हजारों की संख्या में अकीदतमंद उमड़े। 18 बनी हाशिम के ताबूत की जियारत कराई गई। जंजीर और छुरियों का मातम हुआ। मजलिसों के साथ-साथ पूरे दिन कस्बे में नजरों नियाज का सिलसिला चलता रहा।
सुबह 11 बजे इमामबाड़ा कला से फतेह निशान का जुलूस-ए-अलम निकला। फतेह निशान के साथ अलम और डोले का जुलूस भी उठा। जुलूस बस्ती की गश्त करता हुआ जैसे ही इमामबाड़ा खुर्द पर पहुंचा तो वहां सैकड़ो की तादात में अकीदतमंदों ने जंजीर और छुरियों का मातम कर अपने आप को लहूलुहान कर लिया। जुलुस के मोहल्ला चौधरी चौक पहुंचने पर आग का मातम किया गया। 18 बनी हाशिम के ताबूत की जियारत कराई गई। यहां अंजुमन असगरिया, अंजुमन हैदरी, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन पंजेतनी, अंजुमन जुल्फिकारे हैदरी, अंजुमन अजा हुसैनी ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।
इमामबाड़ा गुलशन अली से शुरू हुआ मजलिसों का सिलसिला देर रात दरगाह हजरत अब्बास पर समाप्त हुआ। वहीं, दुनका में शान और शौकत से मुगलों का तख्त निकाला गया। इस मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
बच्चों ने किया अजादारों का स्वागत
जुलूस-ए-अलम में बच्चे भी अजादारों का स्वागत करते नजर आए। बच्चों ने जगह-जगह शर्बत की सबीलें लगाईं। मोहल्ला पछाया में छोटी बच्ची ने जुलूस में आए बच्चों को टाफियां बांटी।
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