बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों को नोट्स देने के बहाने तुलसी नगर में बुलाकर रैगिंग करने के मामले में विश्वविद्यालय ने बीटेक के आरोपी आठ छात्रों को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई विवि प्रशासन ने सोमवार को प्रथम दृष्टया जांच के बाद की है। आरोपी छात्रों को सस्पेंड करने से पहले आरोपी छात्रों से जांच कमेटी ने पूछताछ की, जिसमें उन्होंने रैगिंग की बात स्वीकारते हुए अपनी गलती मानी है। जांच कमेटी ने छात्रों पर कार्रवाई की संस्तुति करते हुए कई बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करके चीफ प्राक्टर को सौंपी है। अब आरोपी छात्र प्राक्टर के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उसी के बाद इस मामले में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी, तब तक इन छात्रों का निलंबन जारी रहेगा।
चीफ प्राक्टर बी आर कुकरेती के सामने बीटेक प्रथम वर्ष के ईआई स्ट्रीम के एक छात्र ने अपने साथ रैगिंग की घटना की शिकायत की थी। हालांकि घटना पांच छात्रों के साथ बताई जा रही है। इस शिकायत की ईआई स्ट्रीम अनुभाग के प्राक्टर यतेंद्र कुमार की अध्यक्षता में बनाई गई जांच कमेटी में कंप्यूटर साइंस के प्राक्टर विनय ऋषिपाल तथा जनक कपूर हैं। ईआई स्ट्रीम के प्राक्टर यतेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी छात्रों की काउंसलिंग की गई। जिन्होंने अपनी गलती स्वीकार की है। आरोपी आठ छात्रों में तीन ईसी और पांच छात्र ईआई स्ट्रीम से बीटेक के द्वितीय वर्ष में पढ़ रहे हैं।
पिता बोले, कार्रवाई कराकर भविष्य खराब नहीं कराना चाहते
प्राक्टर यतेंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार को पीड़ित छात्र के पिता ने जांच कमेटी को बताया कि उनके बेटे ने एक पत्र लिखा है। जिसमें रैगिंग के छात्रों को माफ करने का उल्लेख किया है।उन्होंने कहा कि वह छात्रों पर कार्रवाई कराकर उनका भविष्य खराब नहीं करना चाहते। लेकिन कमेटी के संज्ञान में इस प्रकरण के आने के बाद आरोपी छात्रों के कृत्य की जांच की गई। आरोप सही पाए जाने पर उनके खिलाफ कई बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करके चीफ प्राक्टर को भेजी गई है।
0 पांच छात्रों से हुई थी रैगिंग
रैगिंग की शिकायत चीफ प्राक्टर से सिर्फ एक छात्र ने की है लेकिन रैगिग की यह घटना पांच छात्रों के साथ हुई है। जांच कमेटी ने जानकारी दी कि शेष चार छात्रों ने लिखित में रैगिंग की शिकायत नहीं की है । इस घटना के संज्ञान में होने के कारण मंगलवार को उनसे भी पूछताछ की जाएगी। अगर ये छात्र भी जांच कमेटी को आरोपियों के खिलाफ बयान देते हैं तो उनके खिलाफ मामला और गंभीर हो सकता है।
‘ जांच में आरोपी छात्रों के दोषी पाए जाने पर उन्हें विवि से निष्कासित करते पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। यदि पीड़ित पक्ष अपनी शिकायत वापस लेता है तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल इस प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जा रही है।’ बीआर कुकरेती, चीफ प्राक्टर रुहेलखंड विवि