बरेली। इस बार बकरीद पर पहला ऐसा मौका है जब अधिकांश लोगों ने कुर्बानी के जानवरों की खाल नहीं बेची। बल्कि उन्हें अवशेष के साथ ही दफ्ना दिया।
खाल को लेकर लोगों ने यह फैसला दाम कम होने की वजह से लिया। कुर्बानी के जानवरों की खाल का दाम पिछली बार अचानक से 40 और 50 रुपये हो गया था। तब लोगों ने बेच दिया था। इस बार खाल व्यापारियों में पहले ही 15 से 20 रुपये का दाम तय कर लिया था। यह बात आम लोगों तक पहुंच चुकी थी और उन्होंने भी मन बना लिया था कि अगर ठीक पैसा मिलेगा तो ही बेचेंगे। वही किया जब दाम सही नहीं मिला तो उन्होंने खाल बेचने के बजाए दफ्न कर दिया।
एक तरफ जहां खाल व्यापारियों का तर्क है कि एक्सपोर्ट बंद होने से खाल की खपत नहीं है। इसलिए वह भी मजबूर हैं। ज्यादा पैसों में खाल उठा कर नुक्सान होगा। इधर लोगों का कहना था कि पैसा न के बराबर ही मिलना है तो बेचने का फायदा क्या। उन्होंने भी दफ्ना दिया। उनका कहना है कि खाल बेच कर वह लोग पैसा मदरसों और मस्जिदों या जरूरतमंदों को देते थे। अब वह अपनी हैसियत के मुताबिक जो हो सकेगा वह उन जगहों पर पैसे दे देंगे।