सिरौली/आंवला। सिरौली और रामनगर के 40 से अधिक गांवों को जोड़ने वाली पीली नदी शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण किए गए अंधाधुंध अतिक्रमण एवं बंद हुए जल स्रोतों के कारण पूरी तरह से विलुप्त होकर किसानों के खेतों में तब्दील हो गई। अब यह नदी 30 वर्षों से अपने पुनर्जीवित होने की बाट जोह रही है। इसके पुन: उद्धार के लिए शासन-प्रशासन के प्रयास अब केवल कागजों में ही सिमट कर रह गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, यह नदी मुरादाबाद के रीठ इलाके से आकर सिरौली इलाके से गुजरती हुई केसरपुर, अजमेर, पलथा, सोना, धनौरा से गुजरकर रामनगर ब्लॉक क्षेत्र के गांव तक आकर एरिल नदी में मिल जाती है। इस प्रकार से 45 किमी लंबी नदी करीब 40 गांवों से होकर गुजरती थी। अब अनदेखी के चलते नदी के विलुप्त होने के बाद हजारों किसानों के समक्ष खेतों की सिंचाई का संकट उत्पन्न हो गया।
2020 में पुनजीर्वित की हुई थी कोशिश
पांच साल पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने नदी के पुनरुद्धार के लिए कोशिश की थी। उन्होंने एक माह भीषण गर्मी में अपने कार्यकर्ताओं के साथ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए कारसेवा शुरू की थी। हजारों ग्रामीणों ने फावड़े से खोदाई भी किया। उस समय रामनगर के आलमपुर गांव से सिरौली के अजमेर गांव तक नदी को खोदकर तैयार किया गया, लेकिन कुछ दिन बाद नतीजा शून्य रहा। इसके बाद सीएम के आदेश के बाद लोगों के इसकी उम्मीद जगी थी। तब से यह प्रयास कागजों में ही रहा।
विलुप्त हो चुकी पीली नदी