महंगाई के तीरों से लंकेश त्रस्त
महंगाई का असर अब त्योहारों और आयोजनों पर भी दिखने लगा है। इस बार दशहरे के पावन पर्व पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करना आयोजकों के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है। पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल जैसे बांस, रद्दी, रंगीन और अबरी कागज, गोद तथा आतिशबाजी व पटाखों के दामों में लगातार हुई बढ़ोतरी के कारण निर्माण की कुल लागत में इजाफा हुआ है। इस वजह से कई जगह पुतलों का कद घटा दिया गया है।
बरेली दशहरा रामलीला धार्मिक सेवा समिति के महामंत्री रवि छाबड़ा ने बताया कि इस बार छावनी क्षेत्र की रामलीला में 50 फुट ऊंचे रावण और 40-40 फुट के मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतले खड़े किए गए हैं। इन पुतलों के निर्माण पर करीब एक से सवा लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है, जबकि यही कार्य दो-तीन साल पहले मात्र 70 से 80 हजार रुपये के भीतर आसानी से पूरा हो जाता था। पुतलों की लंबाई भी ज्यादा रहती थी।
चौधरी तालाब रामलीला समिति की ओर से इस वर्ष 60 फुट का रावण और 55-55 फुट के मेघनाद व कुंभकर्ण के विशाल पुतले डेढ़ लाख रुपये की लागत से तैयार करवाए गए हैं। पुराने शहर के रहने वाले पुतला निर्माता सुनील का कहना है कि वे पिछले एक दशक से अधिक समय से इस कला से जुड़े हैं। निर्माण सामग्री की लागत बढ़ने के कारण उन्हें मजबूरी में पुतलों के दाम बढ़ाने पड़े हैं।