एक आना किराये की किताब से की थी पढ़ाई
उन्होंने बताया कि जब देश आजाद हुआ तो किताबों की किल्लत थी। उच्च शिक्षा के लिए बरेली आईं तो किताबें उपलब्ध नहीं थीं। रोजाना एक आना किराये पर किताब लेकर आतीं और शाम तक पढ़कर दुकानदार को लौटा देती थीं। दीदी अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की सचिव रहीं। ‘निराला साहित्य में युगीन समस्याएं’ नाम से पुस्तक लिखी। अतीत की परछाइयां, प्रेरणा के दीप, नेह के सरासिज पुस्तकों का संपादन किया।