महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया तेजी से बदला है। अब अभिभावक उन्हें घर की चहारदीवारी में कैद नहीं रखते। शिक्षा ने उनकी सामाजिक और आर्थिक तरक्की की राह भी खोली है लेकिन फिर भी वे किसी मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही हैं। शहरी क्षेत्र में पढ़ी-लिखी होने के बावजूद 67 फीसदी महिलाएं बेरोजगार हैं। उच्च शिक्षित होने के बाद भी जिन महिलाओं को नौकरी नहीं मिल पाती, उनमें से ज्यादातर अपने ज्ञान का उपयोग सामाजिक, राजनैतिक या व्यापारिक क्षेत्र में करने के बारे में सोचती तक नहीं। उनका अधिकांश समय घरेलू कामकाज या टीवी देखने देखने में ही गुजरता हैं।
शिक्षित महिलाओं की यह स्थिति बरेली कॉलेज बरेली के सांख्यिकी विभाग के शहरी क्षेत्र में किए गए एक सर्वे में सामने आई है। ‘वुमन इज बेस्ड ऑन देयर एजूकेशन एंड द यूटीलाइजेशन ऑफ देयर एजूकेशन इन देयर लाइफ’ नाम से किए गए इस सर्वे में शहर के 10 अलग-अलग इलाकों में हाईस्कूल से पोस्ट ग्रेजुएट और सरकारी व प्राइवेट जॉब करने वाली उच्च शिक्षित 234 महिलाओं की स्थिति का अध्ययन किया गया। इसमें पता चला कि बरेली शहर में पढ़ने-लिखने के बाद 33 महिलाएं ही नौकरीशुदा हैं। 67 फीसदी महिलाएं उच्च शिक्षित होने के बाद भी घरेलू कामकाज में व्यस्त रहती हैं।
गृहणियों के 24 घंटे
12 फीसदी - घर की साफ-सफाई में
10 फीसदी - कपड़े धोने- नहाने में
13 फीसदी - खाना बनाने में
06 फीसदी - बच्चों को पढ़ाने में
19 फीसदी - टीवी देखने या अन्य काम
नौकरीशुदा महिलाएं
22 फीसदी - 10 हजार से कम मासिक वेतन
10 फीसदी - 10 से 30 हजार मासिक वेतन
01 फीसदी - 30 हजार से ऊपर मासिक वेतन
ये है पसंद
पांच फीसदी की फेस बुक, एक फीसदी की ट्विटर, 12 फीसदी की करंट अफेयर न्यूज, 12 फीसदी की गीत-संगीत, 11 फीसदी की नृत्य, 07 फीसदी की खेल, 18 फीसदी की शॉपिंग, 17 फीसदी की मूवी देखना।
महिलाओं की पढ़ाई के बाद की स्थिति पर कराए गए सर्वे में सामने आया कि शादी के पहले अगर उन्हें नौकरी नहीं मिलती तो उनका अधिकांश टाइम घरेलू कामों में ही बीतता है जबकि इस समय का उपयोग वह सामाजिक, राजनैतिक या अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने में कर सकती हैं। -डॉ. शुभ्रा कटारा, हेड ऑफ डिपार्टमेंट सांख्यिकी विभाग बरेली कॉलेज बरेली