फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब रुहेलखंड यूनिवर्सिटी का पेपर हुआ आउट

विज्ञापन
विज्ञापन
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय का एमएससी केमिस्ट्री का द्वितीय पेपर सोमवार को परीक्षा खत्म होने से पहले ही बरेली कॉलेज से बाहर चला गया। माना जा रहा है कि यह पेपर व्हाट्स एप के जरिए कॉलेज से बाहर भेजा गया और उसके बाद सुबह की पाली में कक्ष संख्या 11 में पेपर दे रहे समाजवादी छात्र सभा के पूर्व प्रदेश सचिव विक्रम सिंह गंगवार के पास लिखी हुई कॉपी भी आ गई। परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपी मुड़ी हुई मिलने की वजह से मामला पकड़ में आया। कॉलेज में कॉपी का सीरियल नंबर मिलाया गया तो पाया गया कि यह कॉपी तो 24 मार्च को हुए पेपर में इसी छात्र नेता को आवंटित की गई थी। यानी उस दिन दी गई कॉपी पार कर ली गई थी। इस खुलासे के बाद से कॉलेज में खलबली है। कार्रवाई के लिए कॉलेज ने रिपोर्ट विश्वविद्यालय को भेज दी है। विश्वविद्यालय इस मामले की जांच कराने के बाद कार्रवाई करेगा।
विज्ञापन

विश्वविद्यालय को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, सछास के छात्र नेता विक्रम को परीक्षा कक्ष में सीरियल नंबर 9532737 की कॉपी आवंटित की गई थी लेकिन इसने जो कापी परीक्षा के बाद कक्ष निरीक्षक को जमा की उसका सीरियल नंबर 9458586 था। यही कॉपी बाहर से लिखकर आई थी। 9532737 क्रमांक की कॉपी नहीं मिली, अनुमान है कि इसे भी यह छात्रनेता पार कर ले गया। यह भी आशंका है कि उसने पहले की परीक्षाओं में भी ऐसा ही किया हो सकता है। विश्वविद्यालय कंट्रोल रूम में कॉपियों की चेकिंग में इस मुड़ी हुई कॉपी पर कक्ष निरीक्षक के हस्ताक्षर भी नहीं पाए गए। इससे सबको माजरा समझ में आते देर नहीं लगी। यह कॉपी बाहर से सॉल्वर के जरिए लिखकर परीक्षा कक्ष तक लाई गई। इस पर लिखे जवाब वही थे, जो सवाल पेपर में आए थे। इससे साफ जाहिर होता है कि सॉल्वर के पास पेपर भी बाहर गया होगा। अनुमान है कि यह पेपर व्हाट्स एप के जरिए सॉल्वर तक पहुंचाया गया होगा। चूंकि परीक्षार्थियों को मोबाइल लाने की मनाही है इसलिए संभव है कि सछास नेता के लिए पेपर बाहर भेजने का काम कॉलेज के किसी शिक्षक या कर्मचारी ने अपने मोबाइल व्हाट्स एप के जरिए किया हो।
वर्जन...
मामले में छात्र विक्रम सिंह जिम्मेदार है, जिसने बदली हुई कॉपी जमा की। हमने पूरी रिपोर्ट कुलसचिव को भेजी है। परीक्षार्थी की कॉपी और अन्य रिकार्ड भी भेजा गया है। अब विश्वविद्यालय को इस मामले की जांच कर कार्रवाई करनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-डॉ. एके सक्सेना, वरिष्ठ केंद्राध्यक्ष बरेली कॉलेज
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें