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हिसाब देने की नौबत आई तो ग्रांट लेने से किया इंकार

Tue, 24 Mar 2015 02:10 AM IST
बरेली
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सेल्फ फाइनेंस कोर्सों का हिसाब देने से बचने के लिए बरेली कॉलेज प्रशासन ने अपने कॉलेज के ही 34 शिक्षकों का नुकसान करने की ठान ली है। इनको उच्च शिक्षा गुणवत्ता संवर्द्धन योजना से वेतन की मंजूरी करके शासन ने ग्रांट भी भेज दी। वेतन भुगतान के लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी ने कॉलेज प्रशासन से इन शिक्षकों के बैंक एकाउंट मांगे थे लेकिन ऐन मौके पर यह कह दिया गया कि वेतन की यह ग्रांट नहीं लेना चाहते। कॉलेज प्रशासन के इस फैसले से सारे शिक्षक हक्के-बक्के हैं। इससे खफा ये शिक्षक सोमवार को कमिश्नर से मिले और उन्हें बताया कि उनके साथ यह अन्याय है। कमिश्नर ने मामला डीएम को रेफर किया है। इस मामले में फैसला लेने को डीएम ने मंगलवार को बैठक बुलाई है। कॉलेज प्रशासन को तलब किया गया है।
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यह योजना प्रदेश सरकार ने ए ग्रेड के अनुदानित कॉलेजों के उन सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों को छठा वेतनमान देने के लिए लागू की है, जिनकी नियुक्ति को विश्वविद्यालय से अनुमोदन है और जो शिक्षक बनने की सारी अर्हताएं पूरी करते हैं। कॉलेज में बीबीए, बीसीए, भूगोल, एमएड, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान, बीलिब, पर्यावरण और बायोटेक्नोलॉजी में ऐसे 34 शिक्षक हैं, जिनको इस योजना के लिए कॉलेज प्रशासन ने प्रस्ताव भेजा था। बता दें कि अब तक कॉलेज इन शिक्षकों को लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दे रहा है लेकिन इस योजना में इन्हें छठे वेतनमान का बेसिक, डीए और ग्रेड पे मिलाकर लगभग 45 हजार वेतन मिल सकेगा। इसके लिए शासन ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को लगभग 15 लाख रुपये की ग्रांट भेजी थी। इससे शिक्षकों को एक-एक माह का वेतन भुगतान किया जाता लेकिन कॉलेज प्रशासन ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी से कह दिया है कि वह यह ग्रांट नहीं लेना चाहते लेकिन सूत्रों का कहना है कि ग्रांट भेजने के साथ ही शासन ने कॉलेज से सेल्फ फाइनेंस कोर्सों की फीस से होने वाली आय और खर्च का ब्योरा भी मांगा था। इसके बाद ही कॉलेज प्रशासन ने कदम पीछे खींचे हैं। मंगलवार को होने वाली बैठक में अब इन शिक्षकों का भविष्य तय होगा।

वर्जन...
शासन से एक आदेश आया है, जिसमें कॉलेज की सभी स्रोतों से होने वाली आय से शिक्षकों को छठे वेतनमान देने को कहा गया है। इससे संशय की स्थिति बन रही है कि शासन की इस योजना के तहत शिक्षकों को लगातार वेतन कैसे दिया जाएगा। अगर सरकार खुद वेतन का खर्च वहन करने को तैयार है तो हमें ग्रांट लेने से कोई आपत्ति नहीं है।
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-डॉ. सोमेश यादव, प्राचार्य
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