परीक्षा समिति की बैठक
मनमाने परीक्षक नियुक्त कर प्रयोगात्मक परीक्षा कराने पर प्राचार्य को चेतावनी
- सामान्य विषय न लेने वाले छात्र-छात्राओं को भी राहत देने पर बनी सहमति
बरेली। परीक्षा फार्म भरने के दौरान होने वाली गड़बड़ियों से निजात पाने के लिए विश्वविद्यालय इसके साफ्टवेयर में संशोधन कराएगा। एक छात्र द्वारा तीन प्रयोगात्मक विषय लेने का मामला सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया। वहीं, मनमाने बाह्य परीक्षक नियुक्त कर धामपुर, बिजनौर के आरएसएम कॉलेज को परीक्षा कराने के मामले को रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने चेतावनी देकर रफा-दफा कर दिया। यह निर्णय सोमवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए।
आरएसएम कॉलेज धामपुर, बिजनौर के बीएससी (कृषि) दूसरे, चौथे और छठे सेमेस्टर में प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2019 में बाह्य परीक्षकों को नियुक्त किया गया था। मगर प्राचार्य ने अपने स्तर पर परीक्षकों को नियुक्त कर प्रयोगात्मक परीक्षाएं करा लीं। बाह्य परीक्षक डॉ. अरुण कुमार और डॉ. एसके तोमर ने जब इसका खुलासा किया तो 30 जुलाई को स्पष्टीकरण मांग लिया गया। इस आंतरिक परीक्षक डॉ. राजकुमार सिंह ने अपने जवाब में कहा कि बाह्य परीक्षकों ने प्रयोगात्मक परीक्षा कराने में असमर्थता जाहिर की। तभी प्राचार्य ने डॉ. आरएस लोहिया लखवटी बुलंदशहर को इसके लिए निर्देशित किया। मगर, विश्वविद्यालय ने प्राचार्य के किसी तर्क को नहीं माना और परीक्षाफल रोक दिया। बाद में दोबारा परीक्षक नियुक्त कर प्रयोगात्मक परीक्षा कराकर रिजल्ट घोषित कर दिया। सोमवार को परीक्षा समिति बैठक मेें यह मुद्दा उठा तो कॉलेज को डिबार करने की बात हुई लेकिन चेतावनी देकर मामला रफा-दफा कर दिया गया। बैठक में परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह, प्रो. श्याम बिहारी लाल, डॉ. मुकेश, डॉ. स्वदेश सिंह, डॉ. बीपी सिंह, डॉ. निवेदिता श्रीवास्तव, अजय यादव, विजय बहादुर यादव आदि मौजूद रहे।
परीक्षा फार्म की गड़बड़ी रोकने को अपडेट होगा साफ्टवेयर
आरएसएम कॉलेज धामपुर का छात्र प्रशांत चौहान तीन प्रयोगात्मक विषय लेकर परीक्षा में सम्मिलित हुआ। छात्र के निवेदन पर फिजिकल एजुकेशन की परीक्षा निरस्त कर उसे इतिहास में अनुत्तीर्ण दर्शाते हुए परीक्षाफल संशोधित कर दिया गया है। साथ ही छात्र को 2020 में द्वितीय वर्ष की मुख्य परीक्षा और इतिहास विषय की इंप्रूवमेंट परीक्षा की अनुमति दे दी गई है। इस मामले से सबक लेते हुए यह भी तय हुआ कि विश्वविद्यालय का साफ्टवेयर ऐसा बनाया जाए, जिसमें छात्र गलत विषय भर ही न सकें। बता दें कि नियमानुसार छात्र केवल दो प्रैक्टिकल विषय ले सकता है। मगर साफ्टवेयर में यह सुविधा न होने पर प्रशांत ने तीन प्रयोगात्मक विषय ले लिए।
इन छात्र-छात्राओं को भी मिली राहत
परीक्षा समिति की बैठक में छात्रों के रुके परीक्षाफल घोषित करने, परीक्षाफल संशोधन और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति समेत कई अन्य मामलों पर भी विचार किया गया। इसमें स्वामी कल्याण देव महाविद्यालय, बिजनौर की छात्रा मनीषा को बीए द्वितीय वर्ष की अंक सुधार परीक्षा और तृतीय वर्ष की मुख्य परीक्षा 2020 में देने की अनुमति दी गई है। बीए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में सामान्य विषय न लेकर परीक्षा में शामिल न होने वाले छात्रों का एक विषय निरस्त कराकर सामान्य विषय का परिवर्तन कराकर इनके परीक्षा सुधार के आवेदन स्वीकार कर लिए गए। बरेली कॉलेज की छात्रा सरिता कुमारी बीएड प्रथम वर्ष के परीक्षा सुधार से संबंधित प्रार्थना पत्र को भी स्वीकार कर लिया गया। दिशा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, धामपुर बिजनौर के बीएड प्रथम वर्ष का परीक्षाफल घोषित करने को भी मंजूरी दी गई। बरेली कॉलेज के छात्र राहुल सिंह को बीए प्रथम वर्ष की इंप्रूवमेंट और बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा कराने को भी मंजूरी दी गई। वहीं, वर्ष 2012 के एमबीए के एक छात्र गौरव को बैक परीक्षा की अनुमति नहीं दी गई है।
एक साथ दो डिग्री लेकर फंसी छात्रा, अब बैठी जांच
बैठक में छात्रा कुलविंदर कौर ने उत्तर प्रदेश नर्सिंग एंड मिडवाइव्ज काउंसिल लखनऊ से नर्सिंग डिप्लोमा एवं बीए तृतीय वर्ष सिटी डिग्री कालेज से एक ही वर्ष उत्तीर्ण किया। मामला फंसने पर छात्रा एक डिग्री को रद्द करने की मांग कर रही है। इस मांग को अनुचित मानते हुए जांच के निर्देश दिए गए हैं।