बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय और इससे संबद्घ महाविद्यालयों में शिक्षकों की वरिष्ठता लिस्ट विश्वविद्यालय जल्द ही जारी कर सकता है। अधिकारियों ने कार्य योजना बनानी शुरू कर दी है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और शासनादेश को ध्यान में रखते हुए इस लिस्ट में सीनियारिटी का असेसमेंट करते वक्त एड हॉक (तदर्थ) की अवधि से नियमित होने तक की अवधि को ना जोड़ने की भी बात सामने आ रही है।
इस वर्ष सात दिसंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की ओर से शिक्षकों के वरिष्ठता सूची के एक मामले में शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) इलाहाबाद के 14 मार्च 2018 के पत्र का हवाला दिया है। इसी पत्र का हवाला 20 नवंबर 2019 को देते हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलाधिपति ने भी अपने यहां सीनियारिटी के एक मामले में स्पष्ट किया कि वरिष्ठता क्रम का निर्धारण मौलिक नियुक्ति की तिथि को ही माना जाएगा। इसी तिथि से मूल सेवा को चालू माना जाएगा। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय ने बताया कि शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा और हाईकोर्ट के निर्देशों का भी अध्ययन किया जा रहा है। इसी आधार पर विवि और संबंधित कॉलेजों में वरिष्ठता सूची निर्धारित होगी। इस सूची को केवल प्रमोशन आदि को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा।
...तो बरेली कालेज में पलट जाएगी वरिष्ठता सूची
यदि एड हॉक (तदर्थ) नियुक्ति की तिथि की बजाए परमानेंट करने की तिथि को मूल नियुक्ति तिथि माना गया तो इसका सीधा असर बरेली कॉलेज की वरिष्ठता सूची पर भी पड़ेगा। वर्तमान में यहां पूरा झगड़ा एड हॉक नियुक्ति की समयावधि को जोड़कर वरिष्ठता साबित करने और प्राचार्य पद पाने का चल रहा है। बताया जाता है कि वर्तमान प्राचार्य अनुराग मोहन और इस पद के नए दावेदार पीके अग्रवाल का वरिष्ठता सूची में नाम इनकी एड हॉक सेवाएं जोड़कर आया है। हालांकि इस पद की दावेदार पूर्णिमा अनिल की सेवाओं में एड हॉक नियुक्ति को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में नई वरिष्ठता सूची यदि बनती है तो बरेली कालेज में काफी उठापटक सामने आ सकती है। वैसे चर्चा यह भी है कि शिक्षकोें का एक वर्ग यहां लॉबिंग करके बैठा हुआ है और यह वर्ग प्रबंध समिति के एक गुट के नजदीक भी है। ऐसे में ये लोग किसी भी हाल में कालेज में वरिष्ठता सूची का निर्धारण चाहते ही नहीं हैं।