अब नए सिरे से लिखा जा रहा इतिहास, अपने देश के गौरवशाली अतीत को भी जानेंगे भारतीय
अंग्रेजी मानसिकता से ग्रस्त लेखकों ने की गुलामी की भावना भारतीयों के मन में भरने की कोशिश
बरेली। अंग्रेजों की औपनिवेशिक ओर साम्यवादी मानसिकता से ग्रस्त लेखकों ने भारतीय इतिहास को विकृत कर इसे महज मुगलों और अंग्रेजों के इतिहास के इर्द गिर्द समेट दिया। ऐसा इतिहास लिखा ताकि आम भारतीय मान लें कि भारत शुरू से गुलाम रहा और हूण, शक और मुगलों के बाद अंग्रेजाें ने इस देश पर शासन किया। इसी वजह से आम भारतीय अपने वास्तविक गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और ऐतिहासिक घटनाओं से अनजान रह गया। इतिहास को विकृत करने के पीछे एक उद्देश्य यह भी था कि भारतीयों में राष्ट्र गौरव और राष्ट्रवाद की भावना को पैदा न होने दिया जाए। अब भारत का इतिहास नए सिरे से लिखा जा रहा है जिसमें भारतीयता और भारतीय गौरव को केंद्र में रखा गया है।
बुधवार को अपने गृह नगर बरेली आए भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) और भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) के प्रमुख व सदस्य सचिव प्रो. कुमार रत्नम ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत का इतिहास अब भारतीय मूल्यों, अध्यात्म, भारतीय चिंतन के अनुरूप भारतीय गौरव को बढ़ावा देने वाला होगा। आईसीएचआर नए सिरे से इतिहास लिख रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसे हजारों तथ्य, घटनाएं और व्यक्तित्व हैं जिन्हें भारतीय इतिहास में स्थान ही नहीं दिया गया। पूरा इतिहास कुछ घरानों, व्यक्तित्वों और शासकों के इर्दगिर्द घूमता रहा। जैसे औपनिवेशिक और साम्यवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए षड़यंत्र के तहत इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया हो। इन इतिहासकारों ने लिखा कि भारत में इतिहास मुगलों के अकबरनामा से पहले लिखा ही नहीं गया जबकि पुराणों और चाणक्य के अर्थशास्त्र में कई बार इतिहास की परिभाषा तक बताई गई है। भारतीयों के मन में यह बात जानबूझकर भरने की कोशिश की गई कि भारतीय इतिहास गुलामाें और आक्रमणकारियों का इतिहास रहा है, यहां संघर्ष की कोई गाथा नहीं रही। न किसी भारतीय शासक को बड़ा दिखाने की कोशिश की गई। जैसे भारत का कोई ऐतिहासिक गौरव रहा ही नहीं।
इन तथ्यों को क्यों दबाया गया
प्रो. कुमार रत्नम ने कहा कि भारतीय इतिहास मूल रूप से संघर्ष का इतिहास है। पूरब, दक्षिण और स्वतंत्रता प्राप्ति के दौरान किया गया संघर्ष पूरी तरह दबा दिया गया। दिल्ली केंद्रित इस इतिहास में यह कभी नहीं बताया गया कि असोम के अहोम वंश ने मुगलों को सैकड़ों बार युद्ध में हराया और कमरू कामाख्या क्षेत्र से आगे नहीं बढ़ने दिया। इसी तरह दक्षिण में किस तरह मुगलों को मुंह की खानी पड़ी। उसका उल्लेख कहीं नहीं मिलता। आदिवासी नेताओं का संघर्ष कोई बताने को तैयार नहीं।
जार्जिया से कल्चरल एक्सचेंज पर समझौता जल्द
आईसीएचआर की ओर से भारतीय इतिहास और संस्कृति को बढ़ावा देने को जल्द ही जार्जिया के साथ कल्चरल एक्सचेंज पर समझौता किया जाएगा। इस संबंध में हाल ही में जापान के साथ समझौता हो चुका है। ईरान के साथ भी बातचीत चल रही है।
एक क्लिक पर मिलेगी बरेली के स्वतंत्रता सेनानियों की लिस्ट
आईसीएचआर के शोध जिले वार होंगे। हर जिले के स्वतंत्रता सेनानियों और उनके इतिहास को एक क्लिक में आनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। बरेली के भी 1857 से लेकर देश की आजादी तक के सभी स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास देखा जा सकेगा। प्रो. कुमार ने बताया कि वह 1982 से 86 तक इसी बरेली कालेज बरेली में स्नातक और परास्नातक के छात्र रहे। उन्हें यहां से शिक्षा लेने पर गर्व है।