सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने वाले 3.37 लाख बच्चे इस बार कहीं ठंड में ठिठुरते न रह जाएं। शासन का आदेश था कि सभी बच्चों को 31 अक्तूबर तक स्वेटर का वितरण कर दिया जाए लेकिन सप्लाई न मिलने से अब तक पांच फीसदी बच्चों को भी स्वेटर नहीं मिल सके हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 2900 स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को शासन की तरफ से 31 अक्तूबर तक स्वेटर बांटे जाने थे। इसके लिए जिला स्तर पर टेंडर कराकर एक कंपनी को स्वेटर की आपूर्ति का जिम्मा भी दे दिया गया। यह कंपनी सभी ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर स्वेटरों की आपूर्ति करेगी।
इसके बाद प्रत्येक स्कूल स्तर पर गठित विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के माध्यम से बच्चों को स्वेटर दिए जाने हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी स्कूलों के बच्चों की संख्या के आधार पर ही स्वेटर दिए जा रहे हैं।
इसके बाद बीईओ के माध्यम से सत्यापन कराया जाएगा। स्वेटरों की अब तक पांच प्रतिशत ही आपूर्ति हुई है। इसके लिए शासन स्तर से ही टेंडर की अनुमति देने में देरी को वजह बताया जा रहा है।
बच्चे 200 की जगह 189 की कीमत का स्वेटर पहनेंगे
शासन ने पिछले साल प्रत्येक बच्चे के लिए 200 रुपये की कीमत वाले स्वेटर की खरीद के आदेश विभागीय अधिकारियों को दिए थे, जबकि इस बार जिला स्तर पर टेंडर हो जाने से आपूर्तिकर्ता कंपनी ने 189 रुपये में स्वेटर उपलब्ध कराने का कांट्रेक्ट लिया है।
इतने सस्ते रेट के स्वेटर क्या बच्चों को कड़ाके की ठंड से बचा पाएंगे, इसे लेकर संशय है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जो मानक हैं, उसके आधार पर ही स्वेटर लिए जाएंगे।