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35 करोड़ खाते में वापस आए पर ब्याज एफडी के रेट पर नहीं मिला

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बरेली। बैंक खाते से निकालकर अधिशेष धनराशि के 35 करोड़ रुपये पब्लिक सेक्टर की हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में निवेश करने के मामले में कर्मचारियों के विरोध के बाद बैकफुट पर आए रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने यह धनराशि वापस ले ली। शुक्रवार को बिना किसी कटौती 35 करोड़ रुपये की धनराशि विश्वविद्यालय के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। हालांकि फाइनेंस कंपनी ने इस धनराशि पर विश्वविद्यालय को एफडी के रेट पर ब्याज नहीं दिया।
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पिछले सप्ताह यह चर्चा आम हुई थी कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय की अधिशेष धनराशि के 150 करोड़ रुपये पब्लिक सेक्टर की पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में जमा की गई है। मामला सुर्खियां बना तो वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने सफाई दी कि फाइनेंस कंपनी में पैसा तो जमा किया गया है लेकिन यह धनराशि सिर्फ 35 करोड़ रुपये की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कर्मचारी चाहेंगे तो यह धनराशि वापस ले ली जाएगी। इसके बाद कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय छुट्टी पर चले गए। सोमवार को लौटे तो मिनिस्टीरियल स्टॉफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई। बैठक में कर्मचारी धनराशि वापस लेने पर अड़ गए तो कुलपति और वित्त अधिकारी ने उसी दिन यह धनराशि वापस लेने की कवायद शुरू कर दी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सहायक वित्त अधिकारी हरीश भट्ट ने बताया कि शुक्रवार को कंपनी ने बिना कटौती किए पूरे 35 करोड़ रुपये की धनराशि विश्वविद्यालय के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी है। हालांकि फाइनेंस कंपनी ने इस धनराशि पर विश्वविद्यालय को एफडी के रेट पर ब्याज नहीं दिया।
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