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मंदिर में पूजा-पाठ से नहीं, स्कूल में पढ़ने से भला होगा बेटियों का

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रिठौरा। मंदिर में देवी की आकृति बनाने पर पुजारी और अनुसूचित जाति के लोगों के बीच उपजे विवाद को समाजसेवी शांत करने में जुट गए हैं। सावित्री बाई फुले महासंघ के पदाधिकारियों ने मंदिर में पूजा करने पर अड़े परिवार को नसीहत दी है कि बेटियों का भला मंदिर में पूजा करने से नहीं बल्कि स्कूल में पढ़ने से होगा। इसके बाद अब यह परिवार भी शांत हो गया है।
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रविवार को साहूकारा में अनुसूचित जाति के परिवारों की कुछ किशोरियां झलरा पीपल मंदिर की दीवार पर गौरी परिवार की मिट्टी की आकृतियां बनाने पहुंची थीं। आरोप था कि मंदिर के पुजारी कालीचरण ने उन्हें वहां से भगा दिया। इसके बाद उनके परिवार के लोगों ने हंगामा किया तो पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। पुजारी का आरोप था कि मंदिर की एक दीवार मिट्टी से आकृतियां बनाने से बारिश में मंदिर में गंदगी फैलेगी। पुलिस ने दीवार पर आकृतियां बनवाकर और पूजन कराकर मामला शांत कर दिया था।
सोमवार देर शाम माता सावित्री बाई फुले महासंघ की जिलाध्यक्ष ऊषा किरन टीम के साथ पहुंची। उन्होंने दोनों पक्षों से बात करने के बाद समझाया कि बेटियों का परिवार उनकी शिक्षा और संस्कारों पर जोर दें न कि पूजा पाठ के विवाद में पड़ें। भीम आर्मी के जिला प्रभारी अजय प्रधान और उनकी टीम ने भी इसी तरह का संदेश दिया। क्षेत्रीय लेखपाल महिपाल कश्यप ने मंगलवार को बताया कि उनसे किसी अधिकारी ने इसकी रिपोर्ट ही नहीं मांगी तो जांच का सवाल नहीं उठता। वह मौके पर जानकारी करने जरूर गए थे, पता लगा कि मतभेद निपट गया है। हाफिजगंज थाना प्रभारी एसपी सिंह का भी कहना था कि अनुसूचित जाति की बस्ती में मंदिर है, पुजारी भी कश्यप समाज के हैं तो जातीय विद्वेष की बात न जाने कहां से प्रचारित कर दी गई। बस्ती में सब लोग मिलजुल कर रहे हैं।
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