बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय का पब्लिक सेक्टर की कंपनी पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस में जमा किया गया 150 करोड़ रुपया पूरे का पूरा सही-सलामत मिल पाएगा, इस पर असमंजस बढ़ गया है। दरअसल पीएनबी हाउसिंग ने अपनी 33 प्रतिशत पूंजी शेयर मार्केट में निवेश कर रखी है। और शेयर मार्केट में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी के शेयर की कीमत पिछले एक साल में आधी से भी कम रह गई है। माना जा रहा है कि अगर कंपनी के शेयर की कीमतों में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इसका खामियाजा विश्वविद्यालय को भी भुगतना पड़ सकता है।
पिछले सप्ताह खुलासा हुआ था कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बैंक में जमा अपनी डेढ़ सौ करोड़ रुपये की धनराशि को पब्लिक सेक्टर की हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में पांच साल के लिए निवेश कर दी है। आरोप लगाए गए कि कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने निजी लाभ के लिए नियमों को दरकिनार कर यह धनराशि फाइनेंस कंपनी में निवेश कर दी। वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय इस धनराशि को सिर्फ 35 करोड़ रुपये बता रहे हैं, हालांकि कर्मचारियों की मांग के बावजूद इस बारे में अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है। वित्त अधिकारी का तर्क है कि बैंक से ज्यादा ब्याज दर के कारण यह पैसा मार्च 2019 में पांच साल के लिए कंपनी में निवेश किया गया था, इस पर विश्वविद्यालय को तिमाही ब्याज भी मिल रहा है। शनिवार को पता चला कि यह फाइनेंस कंपनी अपनी 33 प्रतिशत पूंजी शेयर मार्केट में भी निवेश करती है और उसके शेयर का मूल्य लगातार गिर रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय को भी नुकसान झेलना पड़ेगा।
साल भर के अंदर आधी रह गई शेयर की कीमत
पिछले साल 30 मार्च को पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस का शेयर 1292.45 रुपये मूल्य का था। करीब सात महीने पहले विश्वविद्यालय ने जब इसमें निवेश किया तभी एक मार्च 2019 को इस शेयर की कीमत 910.30 रुपये रह गई थी। शेयर मार्केट में कंपनी की लगातार स्थिति बिगड़ने के बावजूद विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों ने 35 करोड़ रुपये इस कंपनी में निवेश कर दिए। कंपनी के शेयर में इसके बाद भी लगातार गिरावट जारी रही और 27 सितंबर को कंपनी का शेयर 612.45 रुपये पर आकर बंद हुआ।
कल कर्मचारियों के सामने रखेंगे स्थिति
कर्मचारियों के लगातार विरोध के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन अब इस मामले को लेकर बैकफुट पर है। वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र पांडेय सोमवार को पूरा मामला कर्मचारियों के समक्ष रखने की तैयारी में हैं। इसके बाद अगर कर्मचारी कंपनी में निवेश की गई राशि वापस लाने को कहेंगे तो एफडी तुड़वाकर यह रुपये वापस कर लिए जाएंगे।
यह कंपनी अपनी 33 प्रतिशत राशि ही शेयर मार्केट में निवेश करती है और शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव तो लगा ही रहता है। सोमवार को कुलपति के माध्यम से पूरी स्थिति स्टाफ के समक्ष रखी जाएगी। अगर वे चाहेंगे तो सारा पैसा वापस ले लिया जाएगा। इसमें सिर्फ ब्याज का ही नुकसान होगा, मूल धनराशि में कोई कटौती नहीं होगी। - सुरेश चंद्र उपाध्याय, वित्त अधिकारी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय