बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 150 करोड़ रुपये निजी कंपनी में निवेश करने को लेकर लगातार घमासान मचा हुआ है। बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय अपने कार्यालयों में मौजूद नहीं थे, जिसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। वहीं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि अगर 30 तारीख तक यह धनराशि निजी कंपनी से निकालकर वापस बैंक में नहीं जमा की गई तो वे लोग कुलपति और वित्त अधिकारी के कार्यालयों में ताला डाल देंगे।
मंगलवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बैंक में जमा डेढ़ सौ करोड़ रुपये प्राइवेट सेक्टर की कंपनी में निवेश किए जाने का मामला चर्चाओं में आया था। कहा जा रहा है कि नियमों को दरकिनार कर कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय यह धनराशि फाइनेंस कंपनी में निवेश कर दी। हालांकि वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय यह धनराशि सिर्फ 35 करोड़ रुपये ही बता रहे हैं। उनका तर्क है कि बैंक की अपेक्षा पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस की ब्याज दर ज्यादा होने के चलते इस कंपनी में निवेश किया गया है। मगर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने यह धनराशि वापस बैंक खातों में लाने को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि अगर 30 सितंबर तक यह धनराशि बैंक खातों में वापस नहीं आई तो एक अक्टूबर को कुलपति और वित्त अधिकारी के कार्यालयों में ताला डाल देंगे। वहीं यह घमासान मचने के बाद बृहस्पतिवार को कुलपति और वित्त अधिकारी अपने कार्यालयों में मौजूद नहीं रहे।
विश्वविद्यालय में करोड़ों के खर्च पर उठ रहे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय में अन्य खर्च पर भी सवाल उठने लगे हैं। विश्वविद्यालय के स्टेडियम में करीब छह करोड़ रुपये खर्च करके एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड बनाया जा रहा है। इसके अलावा दीक्षांत समारोह पर भी भारी-भरकम धनराशि खर्च हुई है, हालांकि इस धनराशि का अब तक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। दीक्षांत समारोह के दौरान ही कैंपस में लाखों रुपये खर्च करके लगवाई गई स्ट्रीट लाइट भी सवालों के घेरे में हैं।